बिरगोला गांव के युवा ने ऑल इंडिया आर्मी रैंकिंग में हासिल किया 27वां स्थान, पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल।
चंपावत। कहते हैं कि पहाड़ की कठिन राहें ही मजबूत इरादों को जन्म देती हैं। सीमांत जनपद चंपावत के सुदूर तल्लादेश क्षेत्र के बिरगोला गांव के युवा अशोक महर ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है। साधारण परिवार से निकलकर भारतीय सेना में सैनिक के रूप में भर्ती हुए अशोक ने अपने अदम्य साहस, अनुशासन और अथक मेहनत के दम पर अब सेकंड लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया है।
अशोक महर ने जीवन में कुछ बड़ा करने का सपना देखा था। सीमित संसाधनों और पहाड़ की चुनौतियों के बीच पले-बढ़े अशोक ने हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य को ही अपनी ताकत बना लिया। वह राजपूताना राइफल्स में सैनिक के रूप में भर्ती हुए, लेकिन उनका सपना केवल वर्दी पहनना नहीं, बल्कि सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा करना था। सिर्फ तीन वर्षों की सेवा के भीतर अशोक ने एसीसी (आर्मी कैडेट कॉलेज) की ऑल इंडिया आर्मी रैंकिंग में 27वां स्थान हासिल कर सेकंड लेफ्टिनेंट पद के लिए चयनित होकर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के सामने परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। अशोक की सफलता की खबर जैसे ही तल्लादेश क्षेत्र में पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव में दीपावली जैसा माहौल बन गया और लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी जाहिर की। अशोक अब क्षेत्र की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का नया चेहरा बन गए हैं। उनके पिता मदन महर ग्रामोत्थान रिप परियोजना में कार्यरत हैं। बेटे की इस उपलब्धि के बाद उनके घर दिनभर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। हर कोई इस सफलता को पूरे क्षेत्र का सम्मान बता रहा है। अशोक महर की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर परियोजना निदेशक बिम्मी जोशी, एबीसी अल्मा मैटर ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चीयरमैन डॉ मदन महर, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के नोडल अधिकारी केदार सिंह बृजवाल, रिप परियोजना के डीपीएम मामराज चौहान तथा सहायक प्रबंधक प्रकाश पाठक सहित अनेक लोगों ने शुभकामनाएं दी हैं। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि अशोक महर ने सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए नई प्रेरणा स्थापित की है। उन्होंने कहा कि अवकाश पर घर लौटने पर अशोक को जिला कार्यालय में सम्मानित किया जाएगा। अशोक की सफलता केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पहाड़ की जीत है जहां संघर्ष जीवन का हिस्सा है और सपने अक्सर संसाधनों से बड़े होते हैं। आज बिरगोला गांव का यह बेटा हजारों युवाओं को यह संदेश दे रहा है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ की चोटियों से भी ऊंची उड़ान भरी जा सकती है।
फोटो – अशोक महर।
चंपावत: तल्लादेश के बेटे ने छुआ आसमान : सैनिक से सेकंड लेफ्टिनेंट बनने तक अशोक महर की प्रेरक उड़ान।

