चंपावत: तीन पीढ़ियों तक असर छोड़ने वाला संकल्प: 79 की उम्र में भी नहीं थके टीकाराम शर्मा।

Share This Post

दूसरों की भलाई को जीवन मानने वाले संघर्षशील समाजसेवी की प्रेरक कहानी।

लोहाघाट। कहते हैं कि जो लोग दूसरों की भलाई के लिए जीते हैं, उनका भला खुद-ब-खुद होता है और उनकी सोच का असर पीढ़ियों तक दिखाई देता है। लधियाघाटी के राजकोट बैज गांव निवासी 79 वर्षीय टीकाराम शर्मा इसका जीवंत उदाहरण हैं। इस उम्र में भी उनका स्वस्थ, प्रसन्नचित्त और सक्रिय रहना इस बात का प्रमाण है कि वे हमेशा समाज के लिए सोचते और दूसरों के हित को अपना धर्म मानते हैं। वर्ष 1981 में पाटी ब्लॉक सृजित होने के बाद, 1984 से श्री शर्मा ने लधियाघाटी क्षेत्र में भीगराडां नाम ब्लॉक बनाए जाने की मांग को लेकर संघर्ष की शुरुआत की। लखनऊ और दिल्ली तक लगातार दौड़ लगाते हुए उनकी फाइलें मोटी होती गईं और घाटी के लोगों का समर्थन भी उन्हें मिलता रहा। बीते 42 वर्षों से वे लधियाघाटी की दो दर्जन ग्राम पंचायतों, चम्पावत ब्लाक के सात तथा घाटी से जुड़े नैनीताल जिले के ओखलकांडां ब्लॉक की 11 ग्राम पंचायतों को मिलाकर नए ब्लॉक की मांग करते आ रहे हैं।
उनके लंबे संघर्ष का असर तब दिखाई दिया जब वर्ष 1987 में भारत सरकार के योजना आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश के पिथौरागढ़ जिले से नए ब्लॉकों के सृजन को लेकर रिपोर्ट मांगी गई। उस समय गुंमदेश, मंच एवं भीगराडां नाम से ब्लॉक सृजन का प्रस्ताव जिला प्रशासन पिथौरागढ़ द्वारा भेजा गया था। इससे पूर्व केंद्र सरकार द्वारा पाटी, धारी, मोरी,  एवं सितारगंज ब्लॉकों का सृजन किया जा चुका था, लेकिन इसके बाद कहीं भी नए ब्लॉक नहीं बन पाए। इसके बावजूद  शर्मा ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी।
ब्लॉक की मांग के साथ-साथ उनकी दूसरी बड़ी इच्छा शिव शक्तिपीठ लधोनधुरा एवं वैष्णवी शक्तिपीठ महरपिनाना जिसे बद्रीनाथ जी के लघु रूप में जाना जाता है को एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होते देखना है। उनका मानना है कि इससे क्षेत्र की धार्मिक पहचान के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलेगा।
हाथों में लाठी, चेहरे पर मुस्कान और दूसरों की खुशी में अपनी खुशी तलाशने वाले दृढ़ निश्चयी टीकाराम शर्मा आज भी अपने संकल्प पर अडिग हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि वे भीगराडां ब्लॉक का सपना साकार होते देखेंगे और तभी जीवन की अंतिम यात्रा पर निकलेंगे। उनका जीवन इस बात की मिसाल है कि सच्ची नीयत और समाजहित की सोच का असर केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक प्रेरणा बनकर जीवित रहता है।


फोटो – 79 वर्षीय  टीकाराम शर्मा, जो भिगराडा ब्लॉक की मांग को लेकर दशकों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं।


Share This Post