पर्यावरण मित्रों और स्वांला डेंजर जोन के श्रमिकों को सपरिवार सहभोज, जिलाधिकारी दंपत्ति ने बढ़ाया हौसला।
चंपावत। समाज के उस वर्ग को शायद ही कभी तीज-त्योहार की खुशियां नसीब होती हों, जो खुद दूसरों के जीवन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में दिन-रात जुटा रहता है। लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने एक ऐसी पहल की, जिसने न केवल फ्रंट वारियर्स का मनोबल बढ़ाया, बल्कि पूरे जनपद को भावुक कर दिया।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अपने आवास पर पर्यावरण मित्रों एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के स्वांला डेंजर जोन में कार्यरत श्रमिकों को सपरिवार आमंत्रित कर सहभोज कराया। स्वयं जिलाधिकारी और उनकी धर्मपत्नी ने सभी का मेहमानों की तरह स्वागत किया, भोजन परोसा और बच्चों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर स्नेह व सम्मान दिया।

समाज के निचले पायदान पर खड़े इन कर्मयोगियों के लिए यह क्षण किसी सम्मान समारोह से कम नहीं था।
जिलाधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि पर्यावरण मित्रों में प्रकृति ने मां जैसा स्वभाव दिया है। जब पूरा शहर सोया रहता है, तब ये लोग अंधेरे में ही बाजार, गलियों और सड़कों को स्वच्छ बनाने में जुट जाते हैं। इसी प्रकार स्वांला डेंजर जोन में दिन-रात मेहनत कर राष्ट्रीय राजमार्ग को यातायात योग्य बनाए रखने वाले श्रमिक भी सच्चे अर्थों में जनसेवक हैं। कई बार रात बारह – एक बजे स्वयं जिलाधिकारी कार्यस्थल पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे हैं। दीपावली पर कार्यस्थल पर ही मिठाई खिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया गया था और अब आवास पर सम्मान देकर उन्हें गौरवान्वित किया गया।

पर्यावरण मित्र अर्जुन, विक्की, मनोज और मोहन सहित अन्य कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि जिलाधिकारी स्वयं उन्हें सपरिवार आमंत्रित कर मेहमान की तरह सत्कार करेंगे। उनके अनुसार यह सम्मान उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण है। स्वांला डेंजर जोन के श्रमिकों ने भी इसे अपने लिए अमूल्य पूंजी बताया, जिसने उनके मनोबल और कार्यक्षमता दोनों को नई ऊर्जा दी है।
इस अवसर के साक्षी एसडीएम अनुराग आर्या एवं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी भारत त्रिपाठी भी बने। जिला प्रशासन की यह पहल केवल एक सहभोज नहीं, बल्कि उन अनदेखे नायकों को दिया गया सच्चा सम्मान है, जो चुपचाप समाज की सेवा में जुटे रहते हैं।
