चंपावत: लोहाघाट में गूँजी सनातन चेतना की हुंकार।

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आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर रामलीला मैदान में विराट हिंदू सम्मेलन — राष्ट्र व संस्कृति रक्षा का संकल्प

लोहाघाट। रविवार को रामलीला मैदान सनातन आस्था, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का साक्षी बना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में “सनातन रहेगा तो राष्ट्र रहेगा” और “राष्ट्र प्रथम, समाज सर्वोपरि” के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण का सामूहिक संकल्प दिखाई दिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता तिलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित शांभवी मुरारी ने की, जबकि संचालन दीपक जोशी ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं भारत माता वंदन से हुआ, जिसके बाद देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
मानेश्वर धाम के धर्माचार्य धर्मराजपुरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैसे जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराया, वैसे ही आज हिंदू समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान और आत्मबल जगाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिसने सदैव “अतिथि देवो भवः” की भावना को अपनाया, वही सनातन आज चुनौतियों के घेरे में है, इसलिए संत-समाज को जनजागरण के लिए आगे आना पड़ रहा है।
आरएसएस के विभाग प्रचारक वतन ने कहा कि योजनाबद्ध तरीके से सनातन परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास हुआ, जिससे संयुक्त परिवार टूटे और समाज अपनी जड़ों से दूर हुआ। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए कहा कि अब सनातन जागरण का नया अध्याय शुरू हो चुका है और समाज संगठित होकर आगे बढ़ रहा है।
महामंडलेश्वर हेमंत पशुपतिनाथ महाराज ने संयुक्त परिवार को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि संस्कार तभी मजबूत होंगे जब पारिवारिक ताना-बाना सुदृढ़ होगा। उन्होंने सनातन परंपराओं को व्यवहार में अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में शिशु मंदिर, विद्या मंदिर, होली विजडम और बालिका विद्या मंदिर के छात्रों ने देशभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। अंत में नगर संघ चालक ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।


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