चंपावत में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने संगठन, संस्कार और सेवा को बताया मजबूत भारत की नींव।
चंपावत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में जिला पंचायत सभागार में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें जनपद के बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य डालचंद उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता जोगा सिंह धौनी ने की। मुख्य वक्ता डालचंद ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने सौ वर्ष के लंबे सफर में व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का जो कार्य किया है, वह अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि संघ का स्वयंसेवक अनुशासन, त्याग और सेवा की भावना से तैयार होता है और यही कारण है कि संघ आज देश ही नहीं बल्कि विश्वभर में एक सशक्त संगठन के रूप में स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा ने समाज को जोड़ने और राष्ट्रीय चरित्र को मजबूत करने का कार्य किया है। प्राकृतिक आपदाओं, महामारी और संकट के समय स्वयंसेवकों ने बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा कर यह सिद्ध किया है कि संघ केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है।
इस अवसर पर मानेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धर्मराज पुरी महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति भारत की पहचान है और इसे कमजोर करने के प्रयास समय-समय पर होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित होकर ऐसी शक्तियों का सामना करना होगा और छुआछूत, भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त कर सामाजिक समरसता को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि जब तक समाज में संस्कार, आस्था और राष्ट्रभक्ति की भावना जीवित रहेगी, तब तक देश की एकता और अखंडता सुरक्षित रहेगी। समाज के सभी वर्गों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करने की आवश्यकता है।
गोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने भी युवाओं को संस्कारित बनाने, समाज को संगठित रखने और सेवा कार्यों को बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विभाग सम्पर्क प्रमुख आनंद ओली, जिला सम्पर्क प्रमुख रमेश उप्रेती, सह प्रचारक जितेन्द्र , विभाग कार्यवाह शंकर जोशी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
फोटो_ जिला पंचायत सभागार में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता, संत महात्मा व अन्य उपस्थितजन।
चंपावत: संघ शताब्दी वर्ष पर विचार मंथन, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक समरसता पर दिया जोर।
