डीएम मनीष कुमार की पहल से बदला आयोजन का स्वरूप, 171 स्टॉलों ने बढ़ाई ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रफ्तार
चंपावत। टनकपुर में आयोजित सरस कॉर्बेट मेला इस वर्ष मॉडल जिला चंपावत की नई पहचान बनकर उभरा। जिला प्रशासन की प्रभावी कार्ययोजना और सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते सात दिनों में लगभग 75 लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया, जिससे स्थानीय उत्पादकों, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा लाभ मिला।
पूर्व में औपचारिकता तक सीमित माने जाने वाले इस आयोजन को इस बार व्यापक स्वरूप दिया गया। कुल 171 स्टॉलों में स्थानीय हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद, पहाड़ी व्यंजन, पारंपरिक वस्त्र एवं घरेलू सामग्री की बिक्री की गई। विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ, जिससे उनकी आय और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि हुई।
मेले में जिले की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पर्यटन संभावनाओं को भी प्रमुखता दी गई। सांस्कृतिक संध्याओं में विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं, जिससे आयोजन में विविधता और आकर्षण बना रहा। साहसिक पर्यटन और स्थानीय दर्शनीय स्थलों की जानकारी भी स्टॉलों के माध्यम से प्रदर्शित की गई।
एपीडी बिम्मी जोशी के नेतृत्व में स्वयं सहायता समूहों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया गया, जिससे आयोजन को व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाया जा सका।
इस प्रकार सरस कॉर्बेट मेला केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित न रहकर ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। प्रशासन की कार्यशैली और दूरदृष्टि ने मॉडल जिला चंपावत की अवधारणा को नई मजबूती प्रदान की है।
चंपावत: सरस कॉर्बेट मेला बना मॉडल जिला चंपावत की नई पहचान, सात दिनों में 75 लाख का कारोबार।
