यूकेडी नेता राजेंद्र पुनेठा ने सुनी पीड़ा—5 साल में न विधायक पहुंचे, न कोई अफसर।
लोहाघाट। लोहाघाट ब्लॉक के नेपाल सीमा से सटे अंतिम गांव डुंगरालेटी में शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर तीखी नाराज़गी जताई। इस दौरान यूकेडी नेता राजेंद्र पुनेठा ने गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनीं और मौके पर हालात का जायजा लिया।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव आज भी पानी, सड़क, सोलर लाइट और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय विधायक का पूरा कार्यकाल बीत गया, लेकिन उन्होंने गांव का रुख तक नहीं किया। इतना ही नहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक कोई जिलाधिकारी भी गांव नहीं पहुंचा, जिससे लोगों में भारी नाराज़गी व्याप्त है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर भी उन्हें घोड़ों और खच्चरों के सहारे गाड़-गधेरों से पानी ढोना पड़ता है। जिला मुख्यालय तक गुहार लगाने के बाद भी केवल आश्वासन मिलते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है। गांव में इंटर कॉलेज न होने के कारण बच्चों को बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है या फिर दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं है। स्थानीय ग्रामीण नरेश चंद, बहादुर चंद, सुरेश सिंह, भीम चंद, नारायण चंद, लक्ष्मण सिंह, विक्रम सिंह और केशव चंद ने बताया कि विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। ऊपर से जंगली जानवरों का आतंक फसलों को बर्बाद कर रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर भी संकट गहरा गया है। इस मौके पर राजेंद्र पुनेठा ने कहा कि सीमांत गांवों की लगातार अनदेखी बेहद चिंताजनक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाकर समाधान के लिए संघर्ष किया जाएगा।
फोटो – डुंगरालेटी गांव में ग्रामीणों की समस्याएं सुनते यूकेडी नेता राजेंद्र पुनेठा, बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी पीड़ा साझा करते ग्रामीण।
चंपावत: सीमांत डुंगरालेटी में फूटा जनाक्रोश, पानी-सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को तरसे ग्रामीण।

