चंपावत: ₹100 रोज़ में कैसे चले घर? भोजन माताओं का कलेक्ट्रेट में जोरदार धरना।

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चंपावत। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आईं भोजन माताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा जिला प्रशासन के समक्ष रखी। विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बदले मात्र ₹100 प्रतिदिन मानदेय दिया जाता है, जिससे परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं है।
भोजन माताओं ने बताया कि वे रोजाना स्कूलों में समय पर पहुंचकर बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं, साफ-सफाई से लेकर अन्य जिम्मेदारियां भी निभाती हैं, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त वेतन मिलता है और न ही अन्य कोई सुविधा। छुट्टी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से भी वे वंचित हैं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने मांग उठाई कि उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम ₹500 से ₹600 प्रतिदिन किया जाए, ताकि वे सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन कर सकें।
भोजन माताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में ₹100 प्रतिदिन से परिवार चलाना असंभव है। उन्होंने प्रशासन से उनकी परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय में शीघ्र वृद्धि करने की मांग की। धरना प्रदर्शन के दौरान भोजन माताओं ने एकजुट होकर सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई।


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