विद्वान पुरोहितों और ज्योतिषाचार्यों की सर्वसम्मति सूर्योदय तिथि के आधार पर 20 मार्च ही शास्त्र सम्मत।
लोहाघाट। चैत्र नवरात्र के प्रारंभ को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति अब समाप्त हो गई है। विद्वान पुरोहितों, ज्योतिषाचार्यों और धर्मग्रंथों के गहन अध्ययन के बाद यह निर्णय लिया गया है कि वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 20 मार्च से ही किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार 19 मार्च को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, जो लगभग 1 घड़ी 22 पला तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या युक्त दिन में देवी पूजन व नवरात्र स्थापना करना वर्जित माना गया है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
ज्योतिषाचार्य एवं भगवताचार्य प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि धर्मशास्त्रों में “उदयातिथि” को ही मान्यता दी गई है, अर्थात सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही पूरे दिन प्रभावी मानी जाती है। धर्मसिंधु सहित अन्य ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि अमावस्या युक्त प्रतिपदा में चंडी पूजन नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग 40 विद्वान पुरोहितों की ऑनलाइन चर्चा और पिछले 40 वर्षों के पंचांगों के अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। पूर्व वर्षों में भी ऐसी स्थिति बनने पर अमावस्या के दिन नवरात्र प्रारंभ नहीं किया गया। वर्ष 1995, 1988, 1989, 1998, 2007 और 2017 के उदाहरण इसका प्रमाण हैं। इस प्रकार सभी शास्त्रीय आधारों और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि 20 मार्च को सूर्योदय में प्रतिपदा तिथि होने के कारण उसी दिन नवरात्र प्रारंभ करना पूर्णतः शास्त्र सम्मत और उचित है।
फोटो – ज्योतिषाचार्य एवं भगवताचार्य प्रकाश पाण्डेय।
चंपावत: 20 मार्च से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र, 19 को अमावस्या के चलते नहीं होगा पूजन।
