चंपावत (पाटी)। दुबड़ बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति से जुड़े किसानों ने जिला प्रशासन द्वारा 01 जनवरी 2026 को दिए गए आश्वासनों पर अब तक ठोस कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो वे समिति कार्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी करने को बाध्य होंगे।

ज्ञात हो कि 01 जनवरी 2026 को “सबका विकास पार्टी” के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र उत्तराखंडी के नेतृत्व में दुबड़ समिति के किसानों ने अपनी 06 सूत्रीय मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया था। वार्ता के दौरान जिला प्रशासन के निर्देश पर सहायक निबंधक द्वारा समाधान पत्र जारी किया गया था। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी केवल बिंदु संख्या-04 पर आंशिक कार्रवाई करते हुए समिति सचिव वासुदेव जोशी को हटाया गया।
किसानों का आरोप है कि उनके स्थान पर भेजे गए सचिव छविराम पूर्व में ₹82 लाख के केसीसी घोटाले की अवधि में दुबड़ समिति में कार्यरत रहे हैं, ऐसे में दस्तावेजों में छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है। साथ ही 05 फरवरी 2026 को जिला प्रशासनिक कमेटी द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत हरतोला समिति के सचिव हरीश चन्द्र मथेला को दुबड़ भेजा गया है, जिसे स्थानीय काश्तकारों एवं प्रबंधकीय समिति ने मानने से इनकार कर दिया है।
किसानों ने बताया कि वर्ष 2025 में 52 दिनों तक चले आंदोलन के बाद गठित जांच समितियों ने ₹82 लाख के घोटाले की पुष्टि की थी। उस दौरान वर्तमान प्रतिस्थानी सचिव छविराम आरोपी सचिव जयराम के साथ सहायक के रूप में कार्यरत थे।
उत्तराखंड सहकारिता के इतिहास में पहली बार प्रबंधन बोर्ड ने अपने अधिकार एवं साहस का परिचय देते हुए मात्र एक माह के भीतर तीन बार समिति सचिवों को हटाकर ताश के पत्तों की तरह फेरबदल किया। इस कदम की सराहना करते हुए “सबका विकास पार्टी” के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश शर्मा उर्फ नरेंद्र उत्तराखंडी ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करने वाले जिलाधिकारी मनीष कुमार को “कुशल प्रशासक” बताते हुए उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस बीच, किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग करते हुए औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा।

किसानों की मांग है कि छविराम को तत्काल हटाकर सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता), विकास खण्ड पाटी को दुबड़ समिति का सचिव का कार्यभार दिया जाए, ताकि दैनिक कार्य सुचारु रूप से चल सके और अभिलेख सुरक्षित रहें।
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो समिति कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
