सरकारी स्कूल से पढ़कर हासिल की बड़ी उपलब्धि, डीएम मनीष कुमार बोले – “सपनों को सच करने के लिए संसाधन नहीं, संकल्प चाहिए”
चंपावत। पहाड़ की माटी में पली-बढ़ी बेटियां जब उड़ान भरती हैं तो वे सिर्फ अपना नहीं, पूरे जनपद का मान बढ़ाती हैं। बंतोली गांव की बेटी कुसुम ने यही कर दिखाया है। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय स्थान प्राप्त कर नई मिसाल कायम की है।
सरकारी विद्यालय से प्रारंभ हुई कुसुम की शिक्षा यात्रा संघर्षों से भरी रही, लेकिन उन्होंने हालात को कभी अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। उनकी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ निश्चय ने आज उन्हें उस मुकाम पर पहुंचाया है, जहां पूरा चम्पावत गर्व महसूस कर रहा है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कुसुम और उनके पिता भवान सिंह फर्त्याल को सम्मानित करते हुए कहा, “जब इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। कुसुम ने यह साबित किया है कि पहाड़ की बेटियां किसी से कम नहीं हैं।” उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन भवदीप रावते ने भी कुसुम की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में मिली सफलता ही असली प्रेरणा बनती है। उन्होंने भविष्य की पढ़ाई में आवश्यक सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
कुसुम की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि यदि सपनों में विश्वास हो और मेहनत में निरंतरता, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं।
चंपावत: बंतोली की बेटी कुसुम का कमाल। जेआरएफ में राष्ट्रीय स्तर पर सफलता, चंपावत का बढ़ाया मान।
