चंपावत: मेले की भीड़ में खोया मासूम, देवदूत बनी चंपावत पुलिस।

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चंपावत/टनकपुर। पूर्णागिरी मेले की लाखों की भीड़ के बीच एक मासूम बच्चे के बिछड़ने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन चंपावत पुलिस की सतर्कता और संवेदनशीलता ने कुछ ही देर में उस मासूम को उसके परिवार से मिलाकर एक बड़ा हादसा टाल दिया। बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े और मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस की जमकर सराहना की।
घटना 22 मार्च की है। पूर्णागिरी मेला क्षेत्र टनकपुर स्थित पूर्णागिरी टैक्सी स्टेशन (पुरानी पानी की टंकी के पास) ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल आनन्द सिंह और होमगार्ड अशोक कुमार को एक छोटा बच्चा अकेला बैठा रोता हुआ मिला। बच्चा बेहद घबराया हुआ था और भीड़ के कारण अपने परिजनों के बारे में कुछ भी ठीक से नहीं बता पा रहा था।
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कर्मियों ने तुरंत बच्चे को अपने संरक्षण में लिया, उसे शांत कराया और मेले में मौजूद भीड़ के बीच उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी। भारी भीड़ और शोरगुल के बीच लगातार प्रयास करते हुए पुलिस टीम ने आखिरकार बच्चे के पिता को खोज निकाला और मासूम को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया।
बच्चे को सुरक्षित देखकर परिजनों की आंखें भर आईं। उन्होंने चंपावत पुलिस का धन्यवाद करते हुए कहा कि मेले की भीड़ में बच्चा मिलना लगभग नामुमकिन था, लेकिन पुलिस की तत्परता ने उनकी सबसे बड़ी चिंता खत्म कर दी।
पूर्णागिरी मेले जैसे विशाल और भीड़भाड़ वाले आयोजन में चंपावत पुलिस की मुस्तैदी, संवेदनशीलता और मानवता का यह उदाहरण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि ऐसी ही सतर्कता से बड़े मेले सुरक्षित बनते हैं।


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