चंपावत: “100 पार, फिर भी फुर्ती बरकरार मोती सिंह मेहता का जीवन बना प्रेरणा की जीती-जागती मिसाल”

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“पांच पीढ़ियों का साक्षी, रोज़ 5 किमी की सैर सादगी, सकारात्मक सोच और संस्कारों में छिपा है लंबी उम्र का राज”


लोहाघाट। नगर के ठाड़ाढुंगा मोहल्ले स्थित हीरा मोती निवास में आज एक अनोखा और भावनात्मक माहौल देखने को मिला। अवसर था शिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शतायु पार कर चुके वरिष्ठ शिक्षक मोती सिंह मेहता के शताब्दी वर्ष पूर्ण कर नई शताब्दी में प्रवेश का। इस खास मौके पर उन्हें आशीर्वाद लेने, उनके अनुभव सुनने और स्वस्थ जीवन के रहस्य जानने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।
नौगांव रेगडुं के जूनियर हाई स्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक मोती सिंह मेहता आज भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से 5 किलोमीटर की सैर करते हैं। उन्होंने अपने जीवन में पांच पीढ़ियों को अपनी आंखों से देखा है, जो अपने आप में एक दुर्लभ अनुभव है।
इस अवसर पर उनके पुत्र आनंद मेहता और लक्ष्मण सिंह मेहता द्वारा एक सादगीपूर्ण लेकिन भावनाओं से भरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में किसी प्रकार का दिखावा नहीं, बल्कि माता-पिता के प्रति गहरी श्रद्धा और संस्कारों की सुगंध साफ झलक रही थी। मोती सिंह मेहता का जीवन आज की पीढ़ी के लिए एक संदेश है जहां लोग कम उम्र में ही बीमारियों से घिर जाते हैं, वहीं वे इस उम्र में भी पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं। उनके अनुसार, प्रकृति के साथ जुड़ाव, आपसी ईर्ष्या-द्वेष से दूरी और सकारात्मक सोच ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ पारिवारिक संस्कार कमजोर हुए हैं, जिससे सामाजिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति को अपने दुखों से ज्यादा दूसरों की खुशियों से परेशान नहीं होना चाहिए। जिस घर में बड़ों का सम्मान होता है, वहां समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। उन्होंने आगे कहा कि सादगी, शांत स्वभाव, उच्च विचार और परिश्रम ये जीवन के सबसे बड़े “टॉनिक” हैं, जो व्यक्ति को लंबी और स्वस्थ आयु प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा, शिक्षक नेता गोविंद बोरा, शिक्षाविद लोकेश पांडे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने मोती सिंह मेहता के अनुकरणीय जीवन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया और उन्हें इस सदी की अमूल्य धरोहर बताया। पुत्र आनंद और लक्ष्मण ने भावुक होकर कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें आज भी पिता का स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।


फोटो – शताब्दी वर्ष पार कर नई सदी में प्रवेश करते मोती सिंह मेहता, परिवार के साथ खुशी के पल साझा करते हुए।


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