अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: प्रशासन, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण में आगे बढ़कर जिले का नाम रोशन कर रहीं कई सशक्त महिलाएं।
चंपावत। महिला केवल सृष्टि की रचयिता ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी भी होती है। ममता, प्यार, दुलार, करुणा और अपनत्व की वह अनमोल धारा है, जो जिस घर में सम्मान और खुशहाली के साथ रहती है, वहां सुख-शांति और समृद्धि स्वतः ही महकने लगती है। जीवन के अनेक संघर्षों और चुनौतियों के बावजूद महिला की आभा और उसकी चमक कभी कम नहीं होती। वास्तव में वह श्री और लक्ष्मी का साक्षात रूप है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चम्पावत जिले की कुछ ऐसी महिलाएं हैं, जो अपने कार्यों, सोच और समर्पण से समाज में अलग पहचान बना रही हैं।
रेखा यादव पुलिस अधीक्षक चंपावत –
चंपावत के मॉडल जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने कम समय में ही अपनी प्रशासनिक क्षमता और कार्यशैली से अलग पहचान बनाई है। आधुनिक पुलिसिंग की सोच के साथ कार्य करते हुए उन्होंने यह संदेश दिया है कि महिला नेतृत्व भी उतना ही मजबूत और प्रभावी हो सकता है। उनका मानना है कि महिला परिवार और समाज की धुरी होती है और वर्ष भर मुस्कुराते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करती है। इसलिए समाज को महिलाओं के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए। उनका कहना है कि जब महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होती है, तो वे और अधिक सशक्त बनती हैं। युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज को सकारात्मक दिशा देने में भी वे माताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण मानती हैं।

विम्मी जोशी –
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) की उत्तरी योजना की निदेशक विम्मी जोशी एक कर्मठ और प्रतिबद्ध अधिकारी के रूप में जानी जाती हैं। उनका मानना है कि सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं और वेतन के बदले समाज के लिए ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करना ही सच्ची सेवा है। दिनभर काम करने के बावजूद वे कभी थकान या जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटतीं। महिलाओं को स्वावलंबी और सशक्त बनाने के लिए उनके प्रयासों को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। विम्मी जोशी बताती हैं कि ईमानदारी और समर्पण से काम करने की प्रेरणा उन्हें अपने माता-पिता से मिले संस्कारों से मिली है।

दिया गुरुरानी –
लधियाघाटी क्षेत्र की दिया गुरुरानी समाज सेवा के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रेरणादायक नाम बन चुकी हैं। दूसरों की खुशी में अपनी खुशी तलाशने वाली दिया समाज के कई महत्वपूर्ण अभियानों में अग्रिम पंक्ति में खड़ी रहती हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशा मुक्ति, वनों को आग से बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण जैसे अभियानों में उनका योगदान उल्लेखनीय है। “दिया दीदी” के नाम से पहचानी जाने वाली यह महिला बिना वर्दी की पुलिस की तरह समाज में जागरूकता फैलाने का काम कर रही है। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए वे पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर भी तैयार कर रही हैं और विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर इन उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित कर रही हैं।

अनुराधा सिंह –
हिमवीर वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (हावा) की मुख्य संरक्षिका अनुराधा सिंह हिमवीर परिवारों के बीच एक मार्गदर्शक और स्नेहिल अभिभावक की भूमिका निभा रही हैं। वे बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार देने को भी अत्यंत आवश्यक मानती हैं। सीमाओं की सुरक्षा में लगे जवानों के परिवारों को स्वस्थ और खुशहाल बनाए रखने के लिए वे योग शिविर, आयुर्वेद और होम्योपैथी से जोड़ने जैसे प्रयास कर रही हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे परिवारों को प्रकृति से जोड़कर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश देती हैं। उनका मानना है कि जो व्यक्ति प्रकृति के जितना करीब होगा, उसके विचार और जीवन उतने ही संतुलित और सफल होंगे।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चम्पावत की ये महिलाएं यह संदेश देती हैं कि संकल्प, सेवा और समर्पण के बल पर महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं और समाज को नई दिशा दे सकती हैं।

