रविवार को भी पहुंचे मौके पर, जोखिम भरा ऑपरेशन कर निकाला गर्भ में फंसा मृत बछड़ा।
चंपावत। लोहाघाट राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.पी. यादव ने रविवार की छुट्टी के दिन भी सेवा-धर्म निभाते हुए एक गाय को नया जीवन दिया। किसान परिवार से आने वाले डॉ. यादव ने एक बार फिर साबित किया कि मिट्टी और मवेशियों से जुड़ा व्यक्ति ही उनके दर्द को सही मायनों में समझ सकता है।
रविवार को डॉ. यादव अपने गृह क्षेत्र खटीमा आए हुए थे। इसी दौरान चंपावत जिले के रमक गांव निवासी कार्तिक जोशी की गाय नानकमत्ता क्षेत्र की वर्कडंडी ग्राम सभा में प्रसव के दौरान गंभीर रूप से फंस गई। स्थानीय स्तर पर कई प्रयास और उपचार किए गए, लेकिन गाय की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उसकी जान पर संकट गहराने लगा।
इस बीच किसी ने सूचना दी कि डॉ. यादव खटीमा में मौजूद हैं। सूचना मिलते ही उन्होंने बिना किसी देरी के मौके पर जाने का निर्णय लिया। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि बछड़ा गर्भ में बुरी तरह फंसा हुआ था, स्थिति अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। इसके बावजूद डॉ. यादव ने हिम्मत नहीं हारी। खून से सने कपड़ों की परवाह किए बिना उन्होंने घंटों तक पूरी सावधानी, धैर्य और चिकित्सकीय कौशल के साथ जटिल ऑपरेशन किया और गर्भ में फंसे मृत बछड़े को बाहर निकाला, जिससे गाय की जान बच सकी।
डॉ. यादव के अथक प्रयासों के बाद गाय अब पूरी तरह स्वस्थ है और चारा-पानी ले रही है। इस सफल उपचार से पशुपालक कार्तिक जोशी और उनका परिवार भावुक हो उठा। उन्होंने कहा,
“डॉक्टर साहब मेरे लिए और मेरी गाय के लिए सचमुच देवदूत बनकर आए हैं।”
डॉ. जे.पी. यादव की यह पहल एक बार फिर सिद्ध करती है कि सच्चा चिकित्सक वही होता है, जो अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा और धर्म मानता है।
फोटो_गाय के गर्भ से मृत बछड़ा निकालकर उसकी जान बचाते वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.पी. यादव।
चंपावत: छुट्टी पर भी सेवा- किसान के बेटे डॉक्टर ने जटिल प्रसव से बचाई गाय की जान।
