27वें महिला सम्मेलन में गूंजा स्वर “चूड़ी वाले हाथ अब अबला नहीं, सबला हैं”।
लोहाघाट। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार और महिला जागरूकता की बदौलत गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। इस बदलाव में महिलाओं की अग्रणी भूमिका रही है। यह विचार पर्यावरण संरक्षण समिति तोली द्वारा आयोजित उत्तराखंड महिला परिषद के 27वें महिला सम्मेलन में स्वयं महिलाओं ने व्यक्त किए। पर्यावरण संरक्षण समिति द्वारा प्रतिवर्ष महिला सम्मेलन आयोजित कर महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाता रहा है। यह सम्मेलन उत्तराखंड सेवा निधि के आर्थिक सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुंदर सिंह लड़वाल ने की, जबकि संचालन आशा पगारिया ने किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तराखंड महिला परिषद की अध्यक्ष अनुराधा पांडे ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “अब चूड़ी वाले हाथ अबला नहीं, सबला हो चुके हैं।” उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को थोड़ा सहारा और अवसर मिले तो वे अपनी संगठनात्मक शक्ति के बल पर न केवल स्वयं का उत्थान कर सकती हैं, बल्कि समाज के विकास की धुरी भी बन सकती हैं। इस अवसर पर पुनाकोट, रौलामेल, ज्योलाडीं, गूम, कमलेख, पाटी, भटयुणा आदि डेढ़ दर्जन गांवों से आई देवकी देवी, विमला फर्त्याल, सोनी गहतोड़ी, मुन्नी देवी, पार्वती देवी, हिमानी बोहरा, अंजली बोहरा ने पर्यावरण संरक्षण समिति द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम शिक्षण केंद्र की स्थापना को सामाजिक जागरण की मिसाल बताया। सम्मेलन में 200 से अधिक महिलाओं ने भागीदारी की।
महिलाओं ने जंगली जानवरों से खेती की सुरक्षा, स्वरोजगार के अवसर, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर अपने विचार रखे। समिति द्वारा कंप्यूटर प्रशिक्षण, सिलाई, बुनाई एवं कढ़ाई जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है, जिस पर सभी ने प्रसन्नता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने होली के रंगों के साथ खड़ी होली और झोडा गायन प्रस्तुत कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया। पर्यावरण संरक्षण समिति ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
फोटो – पाटी के तोली गांव में आयोजित 27वें महिला सम्मेलन में उत्साहित महिलाएं।
चंपावत: महिला जागरूकता से बदल रहा है पाटी के ग्रामीण क्षेत्रों का परिवेश।
