स्वामी धर्मराज पुरी महाराज की प्रेरणा से गुरुकुल परंपरा में आयोजन, आध्यात्म और इतिहास के संगम का बना साक्षी पूरा धाम।
चंपावत। प्रसिद्ध मानेश्वर धाम में आज श्रद्धा, आस्था और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यहां दर्जनों बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। इस धार्मिक आयोजन के पीछे मठाधीश स्वामी धर्मराज पुरी महाराज की प्रेरणा प्रमुख रही, जिनके मार्गदर्शन में पूरा कार्यक्रम सनातन परंपरा, गुरुकुल संस्कृति और कुमाऊनी संस्कारों के अनुरूप आयोजित हुआ। धाम परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गायत्री मंत्र और वैदिक ऋचाओं की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। हर ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार महसूस किया गया, जिसने इस आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।
मठाधीश स्वामी धर्मराज पुरी महाराज ने अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दिन आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत विशेष है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ, बांके बिहारी जी के दर्शन प्रारंभ होते हैं, कुबेर को धन की प्राप्ति हुई और सुदामा की दरिद्रता समाप्त हुई। साथ ही, त्रेता युग का प्रारंभ भी इसी दिन से माना जाता है तथा भगवान गणेश द्वारा महाभारत लेखन का आरंभ भी इसी तिथि से जुड़ा हुआ है।
मानेश्वर धाम इन दिनों एक और कारण से भी चर्चा में है। हाल ही में गहरी खुदाई के दौरान यहां पांच प्राचीन शिवलिंगों की प्राप्ति हुई है, जिन्हें पांडवों के प्रवास से जोड़कर देखा जा रहा है। इस खोज के बाद से क्षेत्र में धाम की धार्मिक महत्ता को लेकर उत्सुकता और आस्था दोनों बढ़ गई हैं। उपनयन संस्कार के माध्यम से बटुकों के जीवन में आध्यात्मिक जागरण और नई दिशा का संचार होता है। इसी उद्देश्य के साथ इस आयोजन को बड़े स्तर पर संपन्न कराया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी सतीश चंद्र पांडे, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष विजय वर्मा सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। मुख्य आचार्य एवं वेद-पुराणों के ज्ञाता बबलू पांडे ने सभी धार्मिक विधियों को विधिवत संपन्न कराया।
फोटो – मानेश्वर धाम में यज्ञोपवीत संस्कार के दौरान बटुकों को आशीर्वाद देते श्रद्धालु और संत-महात्मा।
चंपावत: मानेश्वर धाम में गूंजे वैदिक मंत्र: अक्षय तृतीया पर दर्जनों बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार, उमड़ा जनसैलाब।
