चंपावत: रंगों की फुहार, सुरों की बौछार- जिला सूचना कार्यालय में गूंजी काली कुमाऊँ की खड़ी होली।

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पत्रकार–प्रशासन एक मंच पर, ढोल की थाप और लोकधुनों से सराबोर हुआ माहौल।

चंपावत। होली के पावन अवसर पर जिला सूचना कार्यालय परिसर में रंग, राग और रिश्तों का अनूठा संगम देखने को मिला। होली मिलन समारोह में जनपद के पत्रकारों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने एक साथ बैठकर काली कुमाऊँ की पारंपरिक खड़ी होली और बैठकी होली का गायन किया।

अबीर-गुलाल की सुगंध, ढोल और मंजीरे की थाप के साथ जब सामूहिक स्वर उठे, तो पूरा परिसर लोकसंस्कृति की मिठास से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक होली गीतों से हुई। “ऐसी होली खेलूं मैं…” जैसे कुमाऊँनी रागों ने सभी को भावविभोर कर दिया। रंगों की हल्की फुहार के बीच हंसी-ठिठोली और आत्मीय संवाद का सिलसिला चलता रहा। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और समन्वय का प्रतीक बन गया।


जिलाधिकारी मनीष कुमार ने पत्रकार बंधुओं को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और स्वयं भी होली गायन में सहभागिता कर उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि होली सामाजिक समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने प्रशासन और पत्रकारों के बीच स्वस्थ संवाद को जनहित के लिए आवश्यक बताया।
अपर जिलाधिकारी कृष्णनाथ गोस्वामी ने भी सभी को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन कार्यक्षेत्र में सहयोग और सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं।


इस अवसर पर जिला सूचना अधिकारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “होली मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संवाद और समन्वय का सशक्त माध्यम है। पत्रकार और प्रशासन जब एक साथ बैठकर लोकसंस्कृति के रंग में रंगते हैं, तो जनपद में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। काली कुमाऊँ की खड़ी होली हमारी समृद्ध परंपरा की पहचान है, जिसे संजोए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
समारोह में विभिन्न विभागों के अधिकारी, सूचना विभाग के कर्मचारी तथा जनपद के अनेक पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बना दिया।


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