डायट लोहाघाट में तीन दिवसीय कार्यशाला, नवाचार, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण और स्थानीय संदर्भों को पाठ्यक्रम से जोड़ने पर जोर
लोहाघाट। डायट लोहाघाट में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सामाजिक विज्ञान कार्यशाला ने शिक्षण पद्धतियों में बदलाव और गुणवत्ता सुधार को लेकर नई दिशा प्रदान की। कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जनपदों से पहुंचे शिक्षकों ने सहभागिता करते हुए सामाजिक विज्ञान विषय को अधिक प्रभावी, व्यवहारिक और छात्र-केन्द्रित बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। जिला समन्वयक डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षण पद्धति में नवाचार आवश्यक है। जनपद सह-समन्वयक प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शिक्षकों को प्रोजेक्ट आधारित और गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए।
डॉ. सुनील कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा, डॉ. रवि कुमार जोशी ने क्रॉस-कटिंग थीम्स, डॉ. कमल गहतोड़ी ने सामाजिक विज्ञान में नवाचार, प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, डॉ. प्रमोद कुमार नौडियाल ने स्थानीय परिवेश आधारित अध्ययन तथा प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल ने स्वॉट एनालिसिस के माध्यम से शिक्षण की चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
तीनों दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय संसाधनों के उपयोग, प्रोजेक्ट कार्य और सहभागी शिक्षण पद्धति को शिक्षा की गुणवत्ता सुधार का प्रभावी माध्यम बताया।
कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ. अवनीश शर्मा, कृष्ण सिंह ऐरी, डॉ. पारुल शर्मा, दीपक सोराड़ी, डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव, शिवराज सिंह तड़ागी एवं राम बालक मिश्रा सहित अनेक शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
फोटो — राज्य स्तरीय सामाजिक विज्ञान कार्यशाला में प्रतिभाग करते शिक्षक।
चंपावत: लोहाघाट से उठी नई शैक्षिक सोच, राज्य स्तरीय कार्यशाला में सामाजिक विज्ञान शिक्षण पर हुआ गहन मंथन
