एमआरआई और क्रिटिकल केयर सेंटर के लोकार्पण के कुछ दिन बाद ही बिगड़ी व्यवस्था, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें।
चंपावत। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। जिला अस्पताल चंपावत में हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर सेंटर और आधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद अस्पताल की सबसे जरूरी जांच सेवाओं में शामिल अल्ट्रासाउंड बंद होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दूर-दराज के गांवों से घंटों सफर तय कर अस्पताल पहुंचने वाले मरीज बिना जांच कराए लौटने को मजबूर हैं, जबकि कई लोगों को निजी अस्पतालों में महंगी जांच करानी पड़ रही है।
सबसे अधिक दिक्कत गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए बार-बार अस्पताल आना आसान नहीं है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप बिष्ट के स्थानांतरण के बाद उनकी अनुपलब्धता के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि, अस्पताल पहुंचे मीडिया कर्मियों ने डॉ. प्रदीप बिष्ट को रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों से बातचीत करते और अस्पताल परिसर में मौजूद पाया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब चिकित्सक अस्पताल में मौजूद थे तो अल्ट्रासाउंड जांच क्यों नहीं हो सकी।
सीएमओ के अनुसार चंपावत से नैनीताल संबद्ध किए गए रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव जोशी को वापस बुलाने के लिए शासन और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं। वहीं स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के स्थानांतरण पर पुनर्विचार का अनुरोध भी किया गया है। उन्होंने बताया कि दो एमबीबीएस चिकित्सकों की तैनाती हुई है, लेकिन अभी तक कोई विशेषज्ञ चिकित्सक जनपद में नहीं पहुंचा है।
दरअसल, जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक, ईएनटी, नेत्र, रेडियोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, फिजीशियन और पैथोलॉजी जैसे अहम विभाग एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में एक डॉक्टर का तबादला होते ही पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
पहाड़ की सबसे बड़ी चुनौती आज भी वही है—भवन और मशीनें तो पहुंच रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पहाड़ी जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थायी तैनाती नहीं होगी, तब तक करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य योजनाएं भी आम लोगों को पूरा लाभ नहीं दे पाएंगी। चंपावत की यह स्थिति एक बार फिर पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने ला रही है।
फोटो_ जिला चिकित्सालय का एक दृश्य।
चंपावत: करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं पर तबादलों की मार, चंपावत जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप!
