

चंपावत। पाटी विकासखंड के पुनोली में फार्म मशीनरी बैंक योजना को लेकर चल रहा विवाद अब जांच की निष्पक्षता और प्रक्रिया पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्रशासनिक जांच में वित्तीय अनियमितता अथवा धन के गबन की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई है, लेकिन ग्राम प्रधानों ने जांच की समयसीमा और तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि योजना को लेकर करीब तीन साल से शिकायतें और सवाल उठते रहे, लेकिन मामले की जांच लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। ग्रामीणों ने लोहाघाट विधायक खुशाल सिंह अधिकारी के क्षेत्र भ्रमण के दौरान भी शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि योजना के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले कृषि उपकरण वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंचे। इसके बाद विधायक की ओर से अधिकारियों से मामले का समाधान कराने की मांग की जाती रही, लेकिन हर बार जांच का भरोसा ही मिलता रहा।

प्रधानों के मुताबिक, 03 सितंबर को विधायक ने मामला प्रमुखता से उठाया। इसके बाद जांच जिस तेजी से हुई, उसने ही नए सवाल खड़े कर दिए। प्रधानों का सीधा सवाल है कि जिस मामले की शिकायतों पर करीब तीन वर्षों तक जांच लंबित रही, उसकी पड़ताल इतनी तेजी से कैसे पूरी हो गई।
पुनोली के ग्राम प्रधान और संबंधित समूह की महिलाओं का दावा है कि जांच रिपोर्ट में जिन उपकरणों के मौके पर मौजूद होने की बात कही गई है, वे वास्तविक लाभार्थियों को उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका कहना है कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेज और अन्य प्रमाण भी हैं। प्रधानों की मांग है कि इन सभी तथ्यों और साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाए।
हालांकि प्रशासनिक जांच में अभिलेखीय और स्थलीय सत्यापन के दौरान आटा चक्की, पावर वीडर और ब्रश कटर समेत संबंधित उपकरण मौके पर मौजूद पाए जाने तथा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं होने की बात कही गई है।
अब मामला सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि उपकरण मौके पर मिले या नहीं। असल सवाल जांच की प्रक्रिया, उसके दायरे और निष्पक्षता को लेकर खड़ा हो गया है। ग्राम प्रधानों ने मामले की स्वतंत्र और विस्तृत जांच की मांग की है, ताकि शिकायतकर्ताओं द्वारा बताए जा रहे दस्तावेजों और साक्ष्यों की भी जांच हो सके।



