चंपावत: देवीरथों की परिक्रमा के साथ लड़ीधूरा महोत्सव संपन्न।

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काकड़-बाराकोट के देवीरथ पहुंचे धाम, डांगरों ने दिया श्रद्धालुओं को आशीर्वाद।

बाराकोट। मां लड़ीधूरा धाम में छह दिवसीय महोत्सव का सोमवार को देवीरथों की परिक्रमा के साथ भव्य समापन हुआ। काकड़ और बाराकोट के देवीरथों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। डांगरों ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। 15 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रमुख प्रतीक बन गया है।

21 अक्टूबर से चल रहे महोत्सव के अंतिम दिन विभिन्न गांवों से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवीरथ मां लड़ीधूरा धाम पहुंचे। ग्राम काकड़ का देवीरथ दोपहर 2:55 बजे पहुंचा। इसमें डांगर कल्याण सिंह मां कालिका के रूप में सवार थे। वहीं, ग्राम बाराकोट का देवीरथ दोपहर 3:13 बजे धाम पहुंचा। इसमें डांगर गुड्डी देवी भगवती और प्रताप सिंह मां कालिका के रूप में सवार थे।

देवीरथों की परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने मां लड़ीधूरा सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। डांगरों से आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों में उत्साह रहा।

15 वर्षों से जारी है महोत्सव_

लड़ीधूरा शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष नागेंद्र कुमार जोशी ने बताया कि क्षेत्रीय जनता और श्रद्धालुओं के सहयोग से महोत्सव पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आयोजन की सफलता पर समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, क्षेत्रीय जनता और पुलिस प्रशासन का आभार जताया।

इस अवसर पर लोकमान सिंह, रमेश जोशी, जगदीश अधिकारी, प्रदीप ढेक, नवीन जोशी, ऋतेश कुमार वर्मा, दुर्गेश जोशी, विनोद सिंह, राजू अधिकारी, दीनू अधिकारी, किशोर जोशी, रजत वर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

फोटो_ मां लड़ीधूरा धाम में परिक्रमा करते देवीरथ।


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