सुअर और बंदरों से तबाह हो रही फसलें, पलायन की कगार पर ग्रामीण।
लोहाघाट। नेपाल सीमा से लगे मडलक क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सुअर और बंदरों के झुंड किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। खेतों में दिन-रात मेहनत कर तैयार की गई फसलें एक ही रात में पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है। किसान कड़ी मेहनत से फसल तैयार करते हैं, लेकिन जंगली सुअर एक ही रात में पूरी फसल चट कर जाते हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि बचे हुए लोग भी अब पलायन का मन बना रहे हैं, जबकि हाल ही में रिवर्स पलायन कर लौटे लोगों का उत्साह भी टूटने लगा है।
किसान परमानंद जोशी, भगवान सिंह, पुष्पा देवी, हयात सिंह, जानकी देवी, विमला देवी, निर्मला देवी टिकल देव, दीवान सिंह, रूक्मणी देवी और रुक्मिणी देवी ने बताया कि वे लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि सरकार किसानों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ (फेंसिंग) लगा रही है, लेकिन उनके क्षेत्र में ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आ रही। उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि आखिर यह कार्य कहां और किस स्तर पर किया जा रहा है।
ग्राम प्रधान महेश जोशी ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से मिलने के लिए लोहाघाट और चंपावत तक आने-जाने में ग्रामीणों की जेब खाली हो जाती है, लेकिन परिणाम शून्य ही रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार के भरोसे उन्होंने लाल चावल जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाया था, लेकिन जंगली जानवरों ने उनके खाने के लिए भी कुछ नहीं छोड़ा।
दिल्ली से सेवानिवृत्त सेंट्रल सेक्रेरेट के प्रकाश उपाध्याय, जो रिवर्स पलायन कर गांव लौटे हैं, ने कहा कि शहरों में रहने वाले लोग जब समस्याओं से घिरते हैं तो उन्हें पहाड़ की याद आती है। उन्होंने जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से वे गांव लौटने के लिए प्रेरित हुए, लेकिन जंगली जानवरों की समस्या ने यहां टिके रहना मुश्किल बना दिया है।
उन्होंने मांग की कि जंगली जानवरों से बचाव के लिए जो तारबाड़ लगाई जा रही है, उसमें प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाए जहां नुकसान सबसे ज्यादा हो रहा है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाने की बात कही।
फोटो – हाड़तोड़ मेहनत के बाद तैयार गेहूं की फसल को एक ही रात में बर्बाद करते जंगली सुअरों का झुंड।
चंपावत: नेपाल सीमा से सटे मडलक क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी।

