चंपावत: पत्थरों में उगाया सोना-  बाणासुर किले की बंजर ढलानों पर नरेश करायत ने खड़ी कर दी फलों की दुनिया।

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जहां कभी उगती थीं झाड़ियां, वहां आज लहलहा रहे 5 हजार फलदार पौधे; बागवानी, दुग्ध, मत्स्य और मुर्गी पालन से बना स्वरोजगार का मॉडल

लोहाघाट। पहाड़ की पथरीली और बंजर जमीन पर खेती की कल्पना करना भी आसान नहीं होता, लेकिन लोहाघाट के प्रगतिशील किसान नरेश करायत ने अपनी मेहनत, जज्बे और दूरदर्शी सोच से इस सोच को बदल दिया है। ऐतिहासिक बाणासुर किले की पश्चिमी ढलानों पर स्थित ग्राम पंचायत मोत्युराज के बनतोडी तोक में उन्होंने वह करिश्मा कर दिखाया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। जहां कभी पत्थर, झाड़-झंखाड़ और वीरानी थी, वहां आज हजारों फलदार पौधों से सजा हरा-भरा फलोद्यान किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
करीब चार वर्ष पहले शुरू हुए इस प्रयास ने अब सफलता की नई इबारत लिख दी है। उद्यान विभाग के तकनीकी सहयोग और एडीओ आशीष रंजन खर्कवाल के मार्गदर्शन में नरेश करायत और अंकुर करायत ने लगभग 80 नाली भूमि पर आधुनिक फलोद्यान विकसित किया। यहां आड़ू, प्लम, सेब, किवी, चेरी और अखरोट समेत विभिन्न प्रजातियों के करीब 5 हजार फलदार पौधे लगाए गए हैं। कई पौधों ने रोपण के एक वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर दिया, जिससे यह बगीचा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
यह फलोद्यान केवल बागवानी तक सीमित नहीं है। यहां मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन को भी सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। परिणामस्वरूप यह क्षेत्र आज बहुआयामी कृषि, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा है। बंजर भूमि को रोजगार और समृद्धि के केंद्र में बदलने की यह कहानी अब पूरे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
उद्यान विभाग के “प्रगतिशील किसानों से मिलन” कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के किसानों ने जब इस फलोद्यान का दौरा किया तो वे इसकी सफलता देखकर अभिभूत हो गए। किसानों ने इसे पहाड़ में आधुनिक खेती और बागवानी की संभावनाओं का जीवंत उदाहरण बताया।
जिला उद्यान अधिकारी मोहित मल्ली ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। नरेश करायत जैसे किसानों की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और मेहनत के बल पर पहाड़ की कठिन जमीन भी सोना उगल सकती है।
विशेष बात यह है कि नरेश करायत पहले से ही दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और अब बागवानी में भी नई मिसाल कायम कर रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पहाड़ की खेती में अपार संभावनाएं छिपी हैं, जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और मेहनत से साकार करने की है।

फोटो_बाणासुर किले की ढलानों पर विकसित आधुनिक फलोद्यान का निरीक्षण करते उद्यान विभाग के अधिकारी और प्रगतिशील किसान।


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