गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषा सीख रहे नौनिहाल, विद्यार्थियों को वितरित की गई अध्ययन सामग्री।
चंपावत। उत्तराखण्ड की लोकभाषाओं को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में कुलेठी स्थित विद्यालय में सराहनीय पहल की जा रही है। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में यहां गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इस अभियान में आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
केंद्र प्रमुख प्रशिक्षक जनार्दन चिलकोटी, केंद्र प्रमुख रुद्र सिंह बोहरा और सहयोगी प्रशिक्षक भूपेंद्र सिंह देव ‘ताऊ’ बच्चों को लोकभाषाओं की बारीकियां सिखा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री, कार्यपुस्तिकाएं और परिचय-पत्र भी वितरित किए गए।
मुख्य अतिथि एवं पतंजलि योगपीठ तथा भारत स्वाभिमान के जिला प्रभारी लोकमणि पंत ने कहा कि मातृभाषा हमारी संस्कृति और पहचान की सबसे अमूल्य धरोहर है। उन्होंने बच्चों से घरों में कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषाओं का अधिक से अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया।
केंद्र प्रमुख प्रशिक्षक जनार्दन चिलकोटी ने बच्चों से अपने दादा-दादी और परिवार के अन्य बुजुर्गों से लोकगीत, लोककथाएं, कहावतें और पारंपरिक शब्द सीखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मातृभाषा का संरक्षण तभी संभव है, जब उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
कार्यक्रम में डूंगर देव जोशी, कमला पनेरू, हिमवत्स संस्था के प्रतिनिधि प्रकाश पुनेठा, प्रियंका सहित विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने इस पहल को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
फोटो_कुलेठी विद्यालय में आयोजित लोकभाषा शिक्षण कक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरित करते मुख्य अतिथि लोकमणि पंत, जनार्दन चिलकोटी और अन्य अतिथि।

