चंपावत: मरीजों के बेहतर इलाज को एक मंच पर आए आयुर्वेद और एलोपैथी के चिकित्सक।

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चंपावत। जिला चिकित्सालय के सभागार में मंगलवार को 11वें आयुर्वेद दिवस के पूर्व आयुर्वेद और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के बीच संवादात्मक संगोष्ठी हुई। “बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल” विषय पर हुई संगोष्ठी में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने के लिए दोनों चिकित्सा पद्धतियों के बीच समन्वय पर चर्चा की गई।

संगोष्ठी में एलोपैथिक चिकित्सकों ने आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रमाणिकता, औषधियों की गुणवत्ता, पंचकर्म, क्षारसूत्र और आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद के समन्वय को लेकर सवाल किए। आयुर्वेद विशेषज्ञों ने उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और चिकित्सकीय अनुभव के आधार पर चिकित्सकों की जिज्ञासाओं का जवाब दिया।

इस दौरान आयुर्वेद को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों और मिथकों पर भी चर्चा हुई। चिकित्सकों ने कहा कि किसी भी मरीज के उपचार का निर्णय उसकी स्थिति, वैज्ञानिक प्रमाण, उपचार की सुरक्षा और चिकित्सकीय विवेक को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों के बीच बेहतर तालमेल से मरीजों को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं।

संगोष्ठी के अंत में चिकित्सकों ने भविष्य में भी ऐसे संवाद और संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति जताई। कार्यक्रम में जिला चिकित्सालय के प्रभारी मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. वेंकटेश द्विवेदी, डॉ. सोनाली मंडल, डॉ. अजय कुमार, डॉ. गौरांग जोशी, डॉ. गौरव, डॉ. सिद्धार्थ त्यागी, डॉ. इरम, मुख्य फार्मेसी अधिकारी विष्णु गिरी, फार्मेसी अधिकारी मनोज पुनेठा, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक नागरकोटी सहित आयुर्वेद विभाग के जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाश सिंह, डॉ. आनंद सिंह गुसाईं, डॉ. सुधाकर गंगवार, डॉ. गिरेंद्र चौहान, डॉ. ज़ेबा मालिक और डॉ. भास्कर मेहंदीरत्ता मौजूद रहे।

फोटो_जिला चिकित्सालय में आयुर्वेद और एलोपैथिक चिकित्सक संगोष्ठी में चर्चा करते हुए।


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