चंपावत की शांत संस्कृति और पर्यटन पहचान को बदनाम करने वाली घटनाएं चिंताजनक, अपराधियों में कानून का भय जरूरी।
चंपावत,13जून। चंपावत आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप उत्तराखंड के एक आदर्श और मॉडल जिले के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास, पर्यटन, ईको-टूरिज्म, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक कार्य संस्कृति के क्षेत्र में जिले ने नई पहचान बनाई है। लेकिन हाल के दिनों में सामने आई कुछ आपराधिक और अमानवीय घटनाओं ने जिले की सकारात्मक छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक छात्रा के साथ हुई दुष्कर्म की एकदम झुटी घटना हो या फिर एक गरीब टैक्सी चालक को जूतों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने तथा उसका मोबाइल छीनने जैसी शर्मनाक घटना, इन कृत्यों की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। यह न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि चंपावत की उस सामाजिक संस्कृति के भी विपरीत हैं जिसके लिए यह जिला जाना जाता है। चंपावत की पहचान हमेशा शांतिप्रिय, सभ्य और सहयोगी समाज के रूप में रही है। यहां के लोग अपनी सादगी, आत्मीयता और प्रकृति प्रेम के लिए पहचाने जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कौन लोग हैं जो अपनी हरकतों से जिले की प्रतिष्ठा और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। पर्यटन किसी भी क्षेत्र की सामाजिक छवि, सुरक्षा और स्थानीय संस्कृति पर आधारित होता है। चंपावत प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक धरोहरों और शांत वातावरण के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। लेकिन यदि ऐसी घटनाएं लगातार सुर्खियां बनती रहीं तो इसका सीधा असर पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सिर्फ कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज को भी ऐसे तत्वों के प्रति शून्य सहिष्णुता का संदेश देना होगा। अपराधियों के लिए सामाजिक स्वीकार्यता समाप्त होनी चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया और कुछ गैर-जिम्मेदार प्लेटफॉर्मों द्वारा बिना तथ्यों की पुष्टि के सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगना आवश्यक है, क्योंकि इससे जिले की छवि अनावश्यक रूप से प्रभावित होती है। निश्चित रूप से पुलिस अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि अपराधियों में कानून का ऐसा भय स्थापित हो कि वे अपराध करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हों। पुलिस का इकबाल और जनता का विश्वास किसी भी जिले की कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होता है।
दूसरी ओर, चंपावत का प्रशासन अपनी त्वरित कार्यशैली के लिए लगातार सराहा जा रहा है। किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में राहत और सहायता पहुंचाने के लिए प्रशासनिक तंत्र जिस तेजी से काम करता है, वह प्रदेश में मिसाल बनता जा रहा है। पीड़ितों तक तत्काल सहायता पहुंचाने की व्यवस्था प्रशासन की संवेदनशीलता और कार्य संस्कृति को दर्शाती है।
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ऐसी आपराधिक घटनाएं जिले की सकारात्मक सोच को देती है चुनौती – जिलाधिकारी
चंपावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार का भी मानना है कि चंपावत के लोग नैसर्गिक रूप से शांत, रचनात्मक और सृजनशील सोच वाले हैं। मुख्यमंत्री द्वारा मॉडल जिले के रूप में विकसित किए जा रहे चंपावत की अनेक विशेषताएं अन्य जिलों और हिमालयी राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। ऐसे माहौल में होने वाली आपराधिक घटनाएं स्वाभाविक रूप से लोगों को कचोटती हैं और जिले की सकारात्मक पहचान को चुनौती देती हैं। आवश्यकता इस बात की है कि विकास और शांति के इस सफर को बदनाम करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई हो तथा समाज और प्रशासन मिलकर यह सुनिश्चित करें कि चंपावत की पहचान उसके विकास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से हो, अपराध और अव्यवस्था से नहीं।
फोटो – जिलाधिकारी मनीष कुमार
चंपावत: मॉडल जिले की छवि पर दाग लगाने वालों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई।

