

ब्लॉक मुख्यालयों पर तालाबंदी के बाद जिला मुख्यालय में धरना, दस सूत्रीय मांगों को लेकर बढ़ा आंदोलन।
चंपावत। पंचायतों की अनदेखी के विरोध में ग्राम प्रधानों का आंदोलन अब ब्लॉक मुख्यालयों से निकलकर विकास भवन तक पहुंच गया है। जिलेभर के प्रधानों ने विकास भवन में धरना-प्रदर्शन कर दस सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रधानों ने चेतावनी दी कि जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
प्रधानों का कहना है कि गांवों के विकास की जिम्मेदारी पंचायतों को दी गई है, लेकिन पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। जिले की 313 ग्राम पंचायतों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य विकास कार्यों के लिए पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधनों की जरूरत है।
प्रधानों ने विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) में ऑफलाइन हाजिरी बहाल करने, जिला योजना की बैठकों में प्रधानों के प्रस्ताव शामिल करने और पर्वतीय क्षेत्रों के अनुरूप पर्याप्त वित्तीय संसाधन देने की मांग की।
इसके अलावा 29 विभागों को ग्राम पंचायतों के अधीन करने, दस लाख रुपये तक के विभागीय कार्य पंचायतों से कराने, प्रधानमंत्री आवास योजना के नियम सरल करने, जनप्रतिनिधियों को टैक्स से मुक्त करने तथा ग्राम प्रधानों को सम्मानजनक मानदेय और भत्ते देने की मांग उठाई।
इससे पहले चंपावत, पाटी, लोहाघाट और बाराकोट में ब्लॉक कार्यालयों पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया जा चुका है। प्रदर्शन में प्रकाश जोशी, महेश भट्ट, निर्मला जोशी, राजेंद्र प्रसाद समेत बड़ी संख्या में प्रधान मौजूद रहे।
प्रधानों ने दो टूक कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, मांगों पर ठोस फैसला चाहिए।
फोटो_ विकास भवन में मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करते ग्राम प्रधान।




