

चंपावत। लंबित मांगों को लेकर मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को विकास भवन में कर्मचारियों ने काला फीता बांधकर विरोध जताया और नारेबाजी करते हुए सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। कर्मचारियों ने कहा कि वार्ता और सहमति के बाद भी शासनादेश जारी नहीं होना गंभीर मामला है। अब मांगें पूरी कराने के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।
फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रियल सर्विसेज एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन की मांगों पर शासन स्तर पर कई बार वार्ता हुई और कुछ मुद्दों पर सहमति भी बनी, लेकिन इसके बावजूद आदेश जारी नहीं हुए। कर्मचारियों ने सरकार से लंबित मामलों में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
प्रमुख मांगों में मिनिस्ट्रियल संवर्ग के पदों का पुनर्गठन, पदनामों में संशोधन, उप निदेशक (प्रशासन) स्तर-11 का पद सृजित करना, एसीपी व्यवस्था लागू करना, पदोन्नति विसंगतियां दूर करना और कॉमन सेवा नियमावली लागू करना शामिल है।

कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन, गोल्डन कार्ड, स्थानांतरण अधिनियम की विसंगतियों, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के दायित्व और आउटसोर्सिंग से नियुक्तियों पर रोक जैसे मुद्दे भी उठाए।
जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि 19 सितंबर तक सांकेतिक विरोध, इसके बाद 20-21 सितंबर को मुख्यमंत्री को ज्ञापन, 25 सितंबर को जिलाधिकारी कार्यालय में धरना और 5 अक्टूबर को देहरादून में महारैली एवं घेराव प्रस्तावित है।
महामंत्री जीवन ओली ने कहा कि अब कर्मचारी केवल आश्वासन स्वीकार नहीं करेंगे। मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।
फोटो/क्लिप_ विकास भवन में काला फीता बांधकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते मिनिस्ट्रियल कर्मचारी।



