चंपावत: 87 की उम्र में भी सेवा का संकल्प, मायावती अस्पताल में रोज नई जिंदगी दे रहे डॉ. डीएस दूबे।

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देश के बड़े-बड़े अस्पतालों का नेतृत्व कर चुके वरिष्ठ चिकित्सक बोले — “मायावती में सेवा करते हुए धरती पर स्वर्ग का अनुभव होता है”


लोहाघाट। दूसरों का जीवन बचाने वाले डॉक्टर को यूं ही ईश्वर का दूसरा रूप नहीं कहा जाता। हालांकि यह हर चिकित्सक के व्यवहार, संवेदनशीलता और सेवा भाव पर निर्भर करता है कि वह इस मान्यता को कितना सार्थक बनाता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनका पूरा जीवन ही मानव सेवा का पर्याय बन जाता है। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं 87 वर्षीय वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डीएस दूबे, जो पिछले 15 वर्षों से लोहाघाट से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित श्री रामकृष्ण मिशन मायावती अस्पताल में निशुल्क चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे मायावती के शांत वातावरण में डॉ. दूबे आज भी घंटों ऑपरेशन थिएटर में खड़े होकर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनका समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। बताया जाता है कि वह कई बार लगातार छह घंटे तक ऑपरेशन थिएटर में अपनी सेवाएं देते हैं। डॉ. डीएस दूबे देश के कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शीर्ष पदों पर रह चुके हैं। वह जिप्मेर पांडिचेरी के डायरेक्टर, दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के निदेशक, राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक, जीटीबी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, रोहतक मेडिकल कॉलेज के निदेशक और पांडिचेरी के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा प्रोफेसर रहे डॉ. दूबे श्री रामकृष्ण मिशन से दीक्षित हैं। उनका कहना है कि मिशन के सानिध्य ने उनके जीवन और सोच दोनों को बदल दिया। वे कहते हैं कि “मायावती अस्पताल में सेवा करते हुए मुझे धरती पर स्वर्ग का अनुभव होता है।” डॉ. दूबे को इस बात का मलाल भी है कि देश-विदेश से ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ चिकित्सक यहां बिना किसी शुल्क के सेवा देने आते हैं, लेकिन स्थानीय लोग उनकी सेवाओं का उतना लाभ नहीं उठा पाते जितना उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले डॉक्टर अपने-अपने क्षेत्र के इतने बड़े विशेषज्ञ हैं कि सामान्य दिनों में उनके क्लीनिकों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, लेकिन मायावती में वे पूरी निस्वार्थ भावना से लोगों की सेवा करने आते हैं। मायावती अस्पताल आज भी पहाड़ में मानव सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल बना हुआ है, जहां चिकित्सा केवल पेशा नहीं बल्कि सेवा और साधना मानी जाती है।


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