हेलीपोर्ट, कॉजवे, रोपवे और सड़क सुविधाओं से बदलेगी पूर्णागिरि मेला क्षेत्र की तस्वीर।
टनकपुर/चंपावत। उत्तर भारत के प्रसिद्ध माँ पूर्णागिरि मेले को वर्षभर संचालित करने की दिशा में प्रशासन और सरकार युद्धस्तर पर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा गत वर्ष पूर्णागिरि मेले के उद्घाटन अवसर पर की गई घोषणा अब धरातल पर तेजी से उतरती दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि निकट भविष्य में पूर्णागिरि मेला केवल तीन माह का न रहकर पूरे वर्ष संचालित किया जाएगा तथा इसके मार्ग में आने वाली सभी प्रमुख बाधाओं को दूर किया जाएगा। बरसात के दौरान तीन स्थानों पर अत्यधिक जलप्रवाह के कारण यात्रा मार्ग बाधित हो जाता था, जिससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। अब इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।
यदि सभी कार्य तय समय पर पूरे हो गए तो वर्ष 2027 से पूर्णागिरि मेला वर्षभर संचालित किए जाने की योजना साकार हो सकती है।
मेला क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, ईको टूरिज्म और सीमांत पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शारदा नदी किनारे चूंका क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। यह ऐसा हेलीपोर्ट होगा जहां एक साथ तीन हेलीकॉप्टर उतर सकेंगे। मुख्यमंत्री की चूंका को “वेडिंग डेस्टिनेशन” और पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना में इसे मील का पत्थर माना जा रहा है। हेलीपोर्ट का निर्माण सितंबर माह तक पूर्ण होने की संभावना है।
इसके अलावा बाटनागाड़ में 35 मीटर लंबे कॉजवे का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है, जिसे इसी माह के अंत तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। कॉजवे की गहराई 12 मीटर तथा चौड़ाई 4.5 मीटर रखी गई है। वहीं बाटनागाड़ से लगभग 700 मीटर अपस्ट्रीम क्षेत्र में 400 मीटर लंबाई तक रिवर चैनलाइजेशन का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
उधर पूर्णागिरि मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे निर्माण कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। साथ ही ककराली गेट से मंदिर तक करीब 19 किलोमीटर मार्ग पर स्थायी विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इन सभी कार्यों की मॉनिटरिंग स्वयं जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा लगातार की जा रही है। जिलाधिकारी का कहना है कि पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलेंगे। इससे धार्मिक पर्यटन, ईको टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था भी और मजबूत होगी।
फोटो_शारदा नदी किनारे चूंका क्षेत्र में निर्माणाधीन अत्याधुनिक हेलीपोर्ट का दृश्य।
चंपावत: सालभर गुलजार रहेगा पूर्णागिरि धाम, युद्धस्तर पर चल रहे विकास कार्य।

