चंपावत: लोकगायिका दीक्षा राणा के निधन से लोहाघाट–चंपावत में शोक, कलाकारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि।

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कुमाऊँनी, गढ़वाली, जौनसारी और थारू लोकसंस्कृति को नई पहचान देने वाली आवाज़ खामोश, शोकसभा में दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि।


लोहाघाट। उत्तराखंड की कुमाऊँनी, गढ़वाली, जौनसारी और थारू लोकसंस्कृतियों को अपने गीतों के माध्यम से एक सूत्र में पिरोकर देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ नेपाल तक लोकप्रिय बनाने वाली प्रख्यात लोकगायिका दीक्षा राणा के निधन से लोहाघाट–चम्पावत क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। उनके असामयिक निधन की खबर से लोकसंस्कृति से जुड़े कलाकारों, प्रशंसकों और सांस्कृतिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्वर्गीय दीक्षा राणा को श्रद्धांजलि देने के लिए स्थानीय रामलीला मैदान में शोक संतप्त कलाकारों और प्रशंसकों द्वारा एक भावपूर्ण शोकसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि लोकसंस्कृति के क्षेत्र में दीक्षा राणा का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से न केवल थारू जनजाति की लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाई, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोकपरंपराओं को भी व्यापक मंच प्रदान किया। उनके गीतों ने सीमाओं से परे जाकर नेपाल तक लोकसंस्कृति की खुशबू फैलाने का काम किया। शोकसभा कार्यक्रम की अध्यक्षता कुमाऊँ लोक सांस्कृतिक कला मंच के अध्यक्ष भैरव दत्त राय ने की। इस अवसर पर जीवन मेहता, मुकेश साह, गोविंद बोरा, जीवन गहतोड़ी, संजीव राणा, नरेश राय, सोनिया आर्या सहित कुमाऊँ लोक सांस्कृतिक कला मंच एवं रामलीला सांस्कृतिक समिति के कई कलाकारों और क्षेत्रीय लोगों ने उपस्थित होकर दिवंगत लोकगायिका को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


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