चंपावत: मंच पीएचसी में उमड़ी गर्भवती महिलाओं की भीड़, एएनसी शिविर ने दिखाई स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती।

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जांच, जागरूकता और संस्थागत प्रसव पर जोर—ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मिली नई ऊर्जा।

चंपावत।मंच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित विशेष एएनसी (ANC) शिविर स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और संवेदनशीलता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। शिविर में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं की उपस्थिति रही, जहां उन्हें न सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य जांच सुविधाएं मिलीं, बल्कि सुरक्षित मातृत्व को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई। शिविर के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ डटी रही। डॉ. प्रकृति तोमर ने गर्भवती महिलाओं का गहन स्वास्थ्य परीक्षण करते हुए उन्हें संतुलित आहार, नियमित जांच और आवश्यक सावधानियों के बारे में विस्तार से समझाया। वहीं लैब टेक्नीशियन गौरव पुनेठा ने सभी जरूरी जांचों को समयबद्ध और सटीक तरीके से पूरा किया, जिससे महिलाओं को त्वरित लाभ मिल सका।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार एएनसी जांच कराना बेहद जरूरी है। इससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी संभव होती है और संभावित जोखिमों को समय रहते रोका जा सकता है।
शिविर में संस्थागत प्रसव को लेकर भी विशेष जागरूकता फैलाई गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी कि प्रसव तिथि नजदीक आने पर वे स्वास्थ्य केंद्र या उसके आसपास ही रहें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) इंद्रजीत पाण्डेय ने शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्वास्थ्य टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शिविर को सफल बनाने में डॉ. प्रकृति तोमर, गौरव पुनेठा, एएनएम शीला प्रहरी व ममता आर्या, सीएचओ ज्योति, स्टाफ नर्स निलोफर अंसारी व नलिम नेगी का विशेष योगदान रहा। आशा फैसिलिटेटर भावना बोहरा के नेतृत्व में आशा कार्यकत्रियों—पुष्पा देवी, हेमंती जोशी, निर्मल बोहरा, सविता देवी, कलावती देवी, लीला जोशी और हेमा जोशी ने गांव-गांव जाकर महिलाओं को शिविर तक लाने में अहम भूमिका निभाई।

फोटो_ शिविर के दौरान गर्भवती महिलाओं की जांच करते चिकित्सक।


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