चंपावत: डबल वोटर पर गिरी अदालत की गाज, चंपावत में मचा सियासी भूचाल।

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जिला पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द, कई जनप्रतिनिधियों पर लटक रही तलवार।

चंपावत। अदालत के एक अहम फैसले ने पंचायत राजनीति में हलचल मचा दी है। एक जिला पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किए जाने के बाद अब उन सभी जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मच गया है, जिनके नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं।
पंचायती चुनाव के दौरान ही कई लोगों ने इस मामले में सक्षम अधिकारियों के सामने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उस समय उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब अदालत के फैसले ने उन सभी शिकायतकर्ताओं को मजबूती दे दी है और वे दोबारा सक्रिय हो गए हैं।
जिले में पहले से ही इस मामले को लेकर कई पिटीशन तैयार की गई थीं, लेकिन अब फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कई ग्राम प्रधानों के साथ लोहाघाट के ब्लॉक प्रमुख भी इस मामले में शामिल हैं और उन्होंने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किए हैं। इसके बाद दूसरा पक्ष भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है।
मामले का केंद्र वे जनप्रतिनिधि हैं, जो रोज़गार के चलते शहरों में रहते हैं और वहीं मतदान भी करते हैं, जबकि उनका नाम उनके मूल गांव की मतदाता सूची में भी बना रहता है। ऐसे में वे दो जगह वोट डालने के साथ-साथ गांव से चुनाव जीतकर प्रतिनिधि भी बन जाते हैं। अदालत का यह फैसला अब ऐसे सभी मामलों पर सीधा असर डाल सकता है।
जनता ने इस फैसले का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि जनप्रतिनिधि पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ चुनाव प्रक्रिया में भाग लें।
अब माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में चंपावत में और भी कई जनप्रतिनिधियों के चुनाव पर सवाल उठ सकते हैं और पंचायत राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


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