निशुल्क चिकित्सा शिविर में 141 नेत्र ऑपरेशन, सैकड़ों मरीजों का हुआ सफल उपचार; पिता-पुत्र सर्जन की जोड़ी बनी आकर्षण का केंद्र।
लोहाघाट। अद्वैत आश्रम मायावती के धर्मार्थ चिकित्सालय में 31 मई से 5 जून तक आयोजित विशाल निशुल्क बहु-विशेषज्ञ चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा शिविर मानव सेवा का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। छह दिनों तक चले इस शिविर में 1764 मरीजों का निःशुल्क परीक्षण, उपचार एवं विभिन्न प्रकार के सफल ऑपरेशन कर उन्हें नई उम्मीद और राहत प्रदान की गई।
प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सौरभ सान्याल के नेतृत्व में डॉ. रूद्र प्रसाद घोष, डॉ. शांतनु मित्रा और डॉ. बेला की टीम ने 638 नेत्र रोगियों का उपचार किया तथा 141 सफल मोतियाबिंद एवं अन्य नेत्र ऑपरेशन किए। शिविर के दौरान तीन ऐसे मरीज भी थे जिनकी आंखों की रोशनी लगभग समाप्त हो चुकी थी। सफल ऑपरेशन के बाद अब वे फिर से इस खूबसूरत दुनिया को देख सकेंगे।
नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. देवव्रत हवलदार ने 375 मरीजों का उपचार किया। उपचार के बाद कई ऐसे मरीजों को स्पष्ट सुनाई देने लगा जो लंबे समय से सुनने की समस्या से जूझ रहे थे।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष कुमार ने 32 हृदय रोगियों का परीक्षण एवं उपचार किया, जबकि पहली बार आयोजित यूरोलॉजी चिकित्सा शिविर में देश के ख्यातिप्राप्त यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक दुबे ने तीन दिनों में 179 मरीजों का परीक्षण कर तीन जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए। कई मरीजों को चिन्हित कर उनके ऑपरेशन बरसात के बाद किए जाने की योजना बनाई गई है।
शिविर का सबसे भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तब देखने को मिला जब देश के वरिष्ठ एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. दुबे ने अपने पुत्र डॉ. दीपक दुबे के साथ एक ही ऑपरेशन टेबल पर मरीज का उपचार किया। पिता-पुत्र की यह सेवा भावना लोगों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी रही।
इसके अलावा डॉ. जयंत मंडल एवं डॉ. अनुज सिंह राणा ने 368 सामान्य रोगियों को चिकित्सा परामर्श और उपचार प्रदान किया, जबकि बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुदेशना राय ने 110 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया। लखनऊ से आए प्रख्यात सर्जन डॉ. नीरज द्विवेदी ने 62 मरीजों का उपचार एवं सफल ऑपरेशन कर राहत पहुंचाई।
अद्वैत आश्रम मायावती के अध्यक्ष स्वामी शुद्धिदानंद जी महाराज तथा चिकित्सालय प्रभारी स्वामी एकदेवानंद जी महाराज ने सभी चिकित्सकों, सहयोगियों एवं स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि मायावती का धर्मार्थ चिकित्सालय आज निस्वार्थ सेवा, करुणा और समर्पण का ऐसा केंद्र बन चुका है, जो जरूरतमंदों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है।
फोटो – मायावती चिकित्सालय में ऑपरेशन के दौरान एक ही टेबल पर मरीज का उपचार करते देश के वरिष्ठ एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. दुबे और उनके पुत्र विश्वप्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक दुबे।
चंपावत: मायावती चिकित्सालय बना मानव सेवा का तीर्थ, छह दिन में 1764 मरीजों को मिली नई जिंदगी।

