चंपावत: आवास योजना की लाभार्थी सूची पर उठे सवाल, डीआरडीए ने बैठाई जांच।

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मझपीपल में पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ देने के आरोप, बीडीओ को स्थलीय जांच के निर्देश।

लोहाघाट/चंपावत। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की लाभार्थी सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। मामला विकासखंड लोहाघाट की ग्राम पंचायत मझपीपल का है। शिकायत में पात्र गरीब परिवारों को योजना के लाभ से वंचित करने और अपात्र लोगों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल किए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने खंड विकास अधिकारी लोहाघाट को स्वयं मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए हैं।



मझपीपल निवासी एवं पीएसआर उत्तर ध्वनि न्यूज़ के मुख्य संपादक पुष्कर सिंह राजपूत ने जिलाधिकारी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि योजना के वास्तविक पात्र और गरीब परिवारों को सूची से बाहर कर आर्थिक रूप से संपन्न एवं प्रभावशाली लोगों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल किए गए हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम दोबारा सूची में शामिल किए गए हैं, जिन्हें पहले ही सरकारी आवास योजना का लाभ मिल चुका है।

शिकायतकर्ता ने एक ही परिवार के दो-दो और तीन-तीन सदस्यों के नाम लाभार्थी सूची में शामिल किए जाने तथा पिता-पुत्र और पिता-पुत्री को अलग-अलग लाभार्थी बनाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

शिकायत में जियो-टैगिंग और अंतिम स्वीकृत लाभार्थी सूची के बीच कथित अंतर का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि प्रारंभिक सर्वे और जियो-टैगिंग के दौरान जिन मामलों में महिलाओं के नाम दर्ज थे, अंतिम सूची में कुछ स्थानों पर पुरुषों के नाम दर्ज कर दिए गए। शिकायतकर्ता ने प्रारंभिक सर्वे सूची, जियो-टैगिंग रिकॉर्ड, ग्राम सभा की कार्यवाही और वर्तमान लाभार्थी सूची का मिलान कराने की मांग की है।

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मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे बीडीओ_

परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की ओर से जारी पत्र में खंड विकास अधिकारी लोहाघाट को स्वयं ग्राम पंचायत मझपीपल का स्थलीय निरीक्षण कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही परिवार रजिस्टर एवं अन्य सरकारी अभिलेखों के आधार पर प्रत्येक लाभार्थी का सत्यापन कर विस्तृत जांच आख्या उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और शिकायतकर्ता को भी भेजी गई है।
अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि लाभार्थी चयन प्रक्रिया में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो अपात्र लाभार्थियों के नाम निरस्त किए जाने के साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी हो सकती है।

फोटो_ पीएसआर उत्तर ध्वनि न्यूज़ के मुख्य संपादक पुष्कर सिंह राजपूत।


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