नंदा-सुनंदा की भक्ति में रंगा चंपावत, पहाड़ की संस्कृति का आईना बनी बच्चों की झांकी।

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पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्र-छात्राओं ने बिखेरी लोक संस्कृति की छटा, डीएम मनीष कुमार ने बढ़ाया उत्साह।

चंपावत। मां नंदा-सुनंदा महोत्सव के अवसर पर गुरुवार को जिला मुख्यालय में पहाड़ की आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर भव्य झांकी निकाली। झांकी में पहाड़ की लोक परंपराओं और धार्मिक संस्कृति की झलक ने लोगों को आकर्षित किया।

पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों का उत्साह देखते ही बना। झांकी के दौरान जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी रही। बच्चों की प्रस्तुतियों ने पहाड़ की उस सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया, जिसे पीढ़ियों से संजोया जाता रहा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने तालियों से बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां नंदा-सुनंदा महोत्सव पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मां नंदा-सुनंदा देवभूमि की आस्था, देव संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन पौराणिक संस्कृति को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण हैं।

जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और जनपद की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने झांकी का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं से मुलाकात की और उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की।

बच्चों और युवाओं को लोक संस्कृति से जोड़ने तथा सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने बालेश्वर मंदिर समिति, स्थानीय युवाओं और बच्चों को ‘मा. मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन किट’ भेंट की। उन्होंने कहा कि पहाड़ की संस्कृति हमारी पहचान है और इसके संरक्षण में नई पीढ़ी की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में आस्था के साथ पहाड़ की संस्कृति की रंगत भी खूब देखने को मिली। स्कूली बच्चों की झांकी ने न सिर्फ लोगों का मन मोहा, बल्कि नई पीढ़ी के हाथों पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत की डोर सुरक्षित होने का संदेश भी दिया।

फोटो_मां नंदा-सुनंदा महोत्सव के दौरान स्थानीय लोगों एवं आयोजन से जुड़े लोगों के साथ मौजूद जिलाधिकारी मनीष कुमार।


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