चंपावत: छतार के क्लॉक टावर पर उठे सवाल, निर्माण रोकने की मांग।

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बेरोजगार संगठन ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, कहा-पहाड़ की पहचान छोड़ दूसरे शहरों की नकल क्यों?

चंपावत। छतार में निर्माणाधीन क्लॉक टावर को लेकर विरोध शुरू हो गया है। बेरोजगार संगठन ने टावर के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और परियोजना की समीक्षा कराने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष हिमांशु गड़कोटी ने 9अक्टूबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निर्माण की योजना पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक पहचान और विशिष्ट पहाड़ी संस्कृति वाले चंपावत में दूसरे शहरों की तर्ज पर संरचनाएं बनाने के बजाय स्थानीय वास्तुकला को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि चंपावत की अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराएं और पहाड़ी वास्तुकला है। ऐसे में विकास योजनाएं तैयार करते समय स्थानीय पहचान और भौगोलिक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने सवाल उठाया कि जब प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान है, तो चंपावत में भी दूसरे स्थानों की तर्ज पर क्लॉक टावर बनाने की जरूरत क्यों महसूस की गई?

हिमांशु गड़कोटी ने पिथौरागढ़ में करीब पांच वर्ष पूर्व निर्मित क्लॉक टावर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इस तरह की संरचना का विरोध हुआ था। इसके बावजूद चंपावत में इसी प्रकार का निर्माण किया जाना स्थानीय मौलिकता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सवाल खड़े करता है।

संगठन का कहना है कि विकास का अर्थ केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि ऐसी योजनाएं तैयार करना भी है, जो क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत को मजबूत करें। चंपावत जैसे ऐतिहासिक नगर में स्थानीय वास्तुकला के अनुरूप मौलिक संरचनाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

ज्ञापन में क्लॉक टावर का निर्माण तत्काल रोकने, परियोजना की समीक्षा कराने और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पहचान के अनुरूप वैकल्पिक डिजाइन तैयार करने की मांग की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह विकास का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि विकास योजनाओं में पहाड़ की मौलिकता और सांस्कृतिक विरासत को महत्व देने की मांग उठा रहा है।

अब जिला प्रशासन के रुख पर नजर रहेगी कि ज्ञापन में उठाई गई आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की जाती है और निर्माणाधीन क्लॉक टावर की समीक्षा की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है।


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