

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की 133 शिकायतें लंबित, डीएम ने अधिकारियों को दिखाया आईना- दूसरों के भरोसे बैठने से नहीं चलेगा काम।
चंपावत। जिले को मॉडल बनाने की मुहिम में जुटे जिलाधिकारी मनीष कुमार के लिए 15 घंटे का कार्यदिवस भी कम पड़ रहा है। चुनाव आयोग की बैठक में शामिल होने दिल्ली पहुंचे डीएम ने वहां से भी जिले की कमान संभाले रखी। वर्चुअल बैठक कर अधिकारियों से सीधे संवाद किया और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों पर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। संदेश साफ था_अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचेंगे तो जनता की समस्याएं आखिर कौन सुलझाएगा?
मुख्य विकास अधिकारी अजय सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान जिले में 133 शिकायतें लंबित मिलीं। इनमें एल-1 स्तर पर 113 और एल-2 स्तर पर 20 शिकायतें शामिल हैं। शिकायतों का लंबा खिंचता इंतजार प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जिलाधिकारी ने इनके निस्तारण के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय कर पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
डीएम ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि जिस विभाग से संबंधित योजना या शिकायत लंबित है, उसके समाधान के लिए संबंधित अधिकारी खुद पहल करें। यह सोचकर न बैठें कि कोई दूसरा आएगा और काम पूरा कर देगा। उन्होंने साफ किया कि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की प्रवृत्ति के कारण कई तकनीकी विभागों की योजनाएं अटक रही हैं। अधिकारियों को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी और समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना होगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि समस्याओं को लटकाने और टरकाने के बजाय उनके निस्तारण का लक्ष्य तय किया जाए। समीक्षा का असली मतलब फाइलों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि जनता को राहत पहुंचाना है। अधिकारियों को तय समयसीमा में शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करना होगा, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
बैठक में एसडीएम सदर विपिन पंत, एसडीएम लोहाघाट नीतू डांगर, एसडीएम पाटी उज्ज्वल डालाकोटी, आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल, लोनिवि के हितेश कांडपाल और जल संस्थान के आरपी डोबाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
फोटो_ दिल्ली से ही वर्चुअल बैठक कर अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते जिलाधिकारी मनीष कुमार।




