चंपावत: 59 में से 28 बसें खड़ी, मॉडल जिले की रोडवेज सेवा बेहाल!

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डीएम ने एमडी के सामने उठाया बसों का मुद्दा, स्पेयर पार्ट्स और संविदा कर्मियों की समस्या दूर करने का मिला भरोसा।

लोहाघाट। मॉडल जिले में रोडवेज की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा अब उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने दिल्ली में उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी से मुलाकात कर टनकपुर और लोहाघाट डिपो की समस्याएं उठाईं। उन्होंने डिपो को अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने, स्पेयर पार्ट्स की कमी दूर करने और संविदा चालकों-परिचालकों की सेवाओं को सुचारु बनाने पर जोर दिया।

प्रबंध निदेशक ने दोनों डिपो में बसों की कमी दूर करने और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। संविदा कर्मियों की सेवाओं में सुधार के लिए भी प्रयास किए जाने की बात कही।

59 बसों में सिर्फ 31 सड़क पर, कई रूटों पर सेवा ठप
इधर, रोडवेज कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष महिपाल सिंह ने डिपो की बदहाल स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि लोहाघाट डिपो की 59 बसों में से केवल 31 ही सड़क पर दौड़ रही हैं, जबकि 28 बसें संचालन से बाहर हैं। इनमें से नौ बसें पांच लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर चुकी हैं। बसों की कमी के चलते चंडीगढ़, कानपुर, सिमलखेत, पंचेश्वर, दिगालीचौड़, रौंसाल, डीडीहाट और धारचूला समेत कई मार्गों पर बस सेवाएं स्थगित करनी पड़ी हैं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

समान वेतन और नियमितीकरण की मांग लंबित_

यूनियन अध्यक्ष ने कहा कि संविदा कर्मचारी लंबे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय उपेक्षा के चलते लोहाघाट डिपो की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। अब देखना होगा कि अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने और व्यवस्था सुधारने का आश्वासन धरातल पर कब तक उतरता है।

फोटो_ बसों की कमी के चलते वीरान पड़ा लोहाघाट रोडवेज स्टेशन।


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