अब सालभर गुलजार रहेगा पूर्णागिरि धाम! रिकॉर्ड श्रद्धालुओं से उत्साहित प्रशासन, मुख्यमंत्री धामी के विजन को धरातल पर उतारने में जुटा जिला प्रशासन।

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मेले के औपचारिक समापन के बाद भी रोज पहुंच रहे 5 हजार से अधिक श्रद्धालु, रोपवे, हेलीपैड, पुल और हाईटेक सुविधाओं के साथ पूर्णागिरि को वर्षभर धार्मिक-पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी।


टनकपुर/चंपावत। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में आस्था का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासनिक रूप से मेले का समापन हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रतिदिन 5 हजार से अधिक श्रद्धालु मां के दरबार में शीश नवाने पहुंच रहे हैं। इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे तीर्थयात्रियों, सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं और दुर्घटनामुक्त मेले की सफलता से उत्साहित जिला प्रशासन अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस महत्वाकांक्षी घोषणा को मूर्त रूप देने में जुट गया है, जिसके तहत पूर्णागिरि मेले को वर्षभर संचालित किया जाना है।
मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर इस बार तीर्थयात्रियों को ‘अतिथि’ मानकर स्वागत करने की नीति अपनाई गई। जिला प्रशासन की प्रभावी व्यवस्थाओं के चलते पूरे मेले के दौरान न तो कोई बड़ी दुर्घटना हुई और न ही किसी प्रकार की अव्यवस्था देखने को मिली। यही कारण है कि देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने वर्ष 2027 से पूर्णागिरि क्षेत्र को बारहमासी धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि मां पूर्णागिरि धाम और श्री रीठा साहिब का अद्भुत संगम चंपावत जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की क्षमता रखता है।
पूर्णागिरि क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए रोपवे निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही देश विदेश से श्रद्धालुओं को वर्ष भर जोड़ने के लिए हेलीपैड निमार्ण, आधुनिक सड़क नेटवर्क और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। ककराली गेट से मंदिर तक लगभग 19 किलोमीटर सड़क मार्ग और 3 किलोमीटर पैदल मार्ग को आधुनिक विद्युत प्रकाश व्यवस्था से रोशन किया जाएगा। बरसाती सीजन में आने वाली चुनौतियों को देखते हुए बाटला गाड़ और किरोड़ा गाड़ पर बड़े पुलों एवं ओवरब्रिजों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें बाटला गाड़ पर 270 मीटर लंबा पुल तथा किरोड़ा गाड़ क्षेत्र में 480 मीटर और 120-120 मीटर के दो ओवरब्रिज शामिल हैं। हालांकि बाटला गाड़ पुल निर्माण में वन विभाग से संबंधित कुछ औपचारिक बाधाएं अभी शेष हैं।
जिलाधिकारी का मानना है कि पूर्णागिरि में वर्षभर मेला संचालन शुरू होने से धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और स्थानीय रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। श्रद्धालुओं को पूर्णागिरि के साथ श्यामलाताल, बालेश्वर मंदिर, गुल्जू देवता मंदिर, मानेश्वर, ऋषेश्वर महादेव, मायावती आश्रम, श्री रीठा साहिब और बाराही धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों से भी जोड़ा जाएगा।
वहीं टनकपुर में स्थायी उपजिलाधिकारी की तैनाती के बाद विकास कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है। एसडीएम प्रमोद कुमार के अनुसार मेले के समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है और उनकी सुरक्षा व सुविधाओं के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

फोटो_ जिलाधिकारी मनीष कुमार।


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