कोरोना काल में शुरू हुआ छोटा प्रयास बना रोजगार और पर्यटन का बड़ा केंद्र, दिल्ली तक पहुंच रहे चंपावत के सेब।
चंपावत। चंपावत के युवा उद्यमी कमल गिरी ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत, लगन और नई सोच के दम पर पहाड़ों में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। कोरोना काल के दौरान शुरू की गई सेब की खेती आज हजार पौधों वाले बड़े एप्पल गार्डन का रूप ले चुकी है। इस पहल ने न सिर्फ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं, बल्कि पलायन रोकने की दिशा में भी एक नई उम्मीद जगाई है।
शुरुआत में कमल गिरी ने विभिन्न क्षेत्रों के बागानों का भ्रमण कर उन्नत तकनीकों और नई प्रजातियों की जानकारी हासिल की। ढाई सौ पौधों से शुरू हुआ यह सफर अब करीब एक हजार पौधों तक पहुंच चुका है। बागान में रेड लम, गाला, टीएक्स, स्निको रेड, जेड-वन और किंग रॉट जैसी प्रजातियों के सेब तैयार किए जा रहे हैं।
शुरुआती चुनौतियों के बावजूद लगातार प्रयासों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई। पहले वर्ष 22 से 23 कुंतल और दूसरे वर्ष 17 कुंतल उत्पादन के बाद इस बार करीब 30 कुंतल सेब मिलने की उम्मीद है। इनमें से 18 से 19 कुंतल सेब की बिक्री पहले ही हो चुकी है और दिल्ली समेत कई शहरों तक इसकी आपूर्ति की जा रही है।
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां ‘सेल्फ प्लकिंग’ की सुविधा भी शुरू की गई है। इसके तहत पर्यटक अपने हाथों से पेड़ों से सेब तोड़ने का अनुभव प्राप्त करते हैं। आसपास मौजूद चाय बागान और प्राकृतिक वातावरण इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, खराब सड़क इस क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। कमल गिरी का कहना है कि सड़क बनने से पर्यटन और बागवानी, दोनों क्षेत्रों को नई रफ्तार मिलेगी।
कमल गिरी का मानना है कि यदि युवा आधुनिक खेती और बागवानी को अपनाएं तो पहाड़ों में रोजगार के असीम अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उनकी यह सफलता आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
फ़ोटो_ कमल गिरी।
