चंपावत: 1 अगस्त से 8 अगस्त तक गोरल धाम में बहेगी श्रीमद्भागवत कथा की अमृत धारा, सजेगा न्याय के देवता श्री गोरल देव का दिव्य दरबार।

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कलश यात्रा के साथ होगा शुभारंभ, भक्ति, संस्कृति और सनातन परंपराओं का होगा संगम।

चंपावत। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की एक और भव्य झलक देखने को मिलेगी। पहाड़ों की मनोरम वादियों में विराजमान न्याय के देवता श्री गोरल देव मंदिर में 1 अगस्त से 8 अगस्त तक सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है।

गोरल ग्राम सेवा समिति, गौरलचौड़ की ओर से आयोजित इस कथा का वाचन प्रसिद्ध कथावाचक राजेंद्र तिवारी के श्रीमुख से किया जाएगा। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, धर्म, कर्म, भक्ति और मानव कल्याण से जुड़े प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इसके साथ ही भजन-कीर्तन, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाएगा।

समिति के सदस्यों का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के संरक्षण और उसके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी है। ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।

आयोजन के पहले दिन एक अगस्त को सुबह आठ बजे श्री नागनाथ मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा श्री बालेश्वर मंदिर होते हुए श्री गोरल देव मंदिर पहुँचेगी। समिति ने क्षेत्र की माताओं और बहनों से पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होने की अपील की है।
न्याय के देवता श्री गोरल देव के इस पावन धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ की गई प्रार्थना पर गोरल देव अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि यह धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड में सनातन संस्कृति और लोक परंपराओं का भी एक जीवंत प्रतीक माना जाता है।


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