चंपावत: करोड़ों की चौकियां, फिर भी पटवारी की तलाश में भटक रहे ग्रामीण!

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ज्यादातर राजस्व चौकियों पर लटके ताले, प्रमाण पत्र और जमीन के काम के लिए लोगों को लगाने पड़ रहे चक्कर

चंपावत। ग्रामीणों को घर के नजदीक राजस्व सेवाएं मुहैया कराने के लिए बनाई गईं राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) चौकियां अब अपनी उपयोगिता को लेकर सवालों के घेरे में हैं। जिलेभर में करोड़ों की लागत से बने इन चौकी भवनों में से अधिकांश में नियमित संचालन नहीं होने से ताले लटके हैं। ऐसे में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र और भूमि संबंधी कार्यों के लिए ग्रामीणों को पटवारियों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी एसके माहेश्वरी की पहल पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में राजस्व उप निरीक्षकों के लिए दर्जनों स्थायी चौकी भवनों का निर्माण कराया गया था। इनका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए तहसील मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन चौकियों में नियमित उपस्थिति नहीं होने से ग्रामीणों को आज भी वही परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रशेखर जोशी ने जिलाधिकारी मनीष कुमार से मामले का संज्ञान लेकर राजस्व चौकियों में पटवारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चौकी में सप्ताह में कम से कम तीन दिन पटवारी की अनिवार्य उपस्थिति तय होनी चाहिए। इससे ग्रामीणों को यह पता रहेगा कि किस दिन उन्हें स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाएं मिलेंगी और अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी।
जोशी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने में ग्रामीणों को समय और धन दोनों खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिलाधिकारी इस जनसमस्या पर गंभीरता से संज्ञान लेकर चौकियों के लिए निश्चित कार्यदिवस निर्धारित कराने की पहल करेंगे। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है।

फोटो_ लधियाघाटी क्षेत्र में बना राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) चौकी भवन, जहां नियमित संचालन नहीं होने से ग्रामीण राजस्व संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं।


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