चंपावत: कुमाऊंनी बैठकी होली के स्वर्णिम सुरों का अंत, धीरू भाई के निधन से पहाड़ की सांस्कृतिक धरोहर को झटका।

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लोहाघाट। कुमाऊंनी बैठकी होली, भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक संस्कृति के प्रसिद्ध साधक धीरज भारती उर्फ़ धीरू भाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। अल्मोड़ा जनपद के मेकड़ी गांव निवासी धीरू भाई के निधन की खबर से पूरे कुमाऊं के संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कलाकारों, संगीत प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने इसे कुमाऊं की लोक सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
धीरू भाई कुमाऊंनी बैठकी होली, रामलीला गायन और भारतीय शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ कलाकारों में गिने जाते थे। उन्होंने वर्षों तक अपनी मधुर आवाज और संगीत साधना से कुमाऊं की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखा। उनकी गायकी में शास्त्रीय संगीत की गहराई और पहाड़ की लोक संस्कृति की आत्मा झलकती थी। उन्होंने अनेक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोहने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी संगीत के प्रति प्रेरित किया।

माँ शारदे संगीत महाविद्यालय, लोहाघाट के प्राचार्य एवं वरिष्ठ संगीतकार राजू पंत ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि धीरू भाई केवल एक गायक नहीं, बल्कि कुमाऊं की सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे प्रहरी थे। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा के मेकड़ी गांव से निकलकर धीरू भाई ने अपनी कला के बल पर पूरे कुमाऊं में अलग पहचान बनाई। बैठकी होली, रामलीला और लोक संगीत के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। उनकी सादगी, संगीत के प्रति समर्पण और नई पीढ़ी को अपनी परंपरा से जोड़ने का प्रयास उन्हें एक महान कलाकार बनाता है। उनके निधन से संगीत जगत में ऐसी रिक्तता पैदा हुई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

धीरू भाई के निधन पर विरासत होली कमेटी, लोहाघाट, माँ शारदे संगीत महाविद्यालय के शिक्षक एवं संगीत प्रेमियों के साथ-साथ एलएसएम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय पिथौरागढ़ में संगीत विभाग के प्राध्यापक कुलदीप बवाड़ी सहित अनेक कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

फोटो_ कुमाऊंनी बैठकी होली के अमर स्वर साधक धीरज भारती ‘धीरू भाई’, उनकी आवाज अब यादों में गूंजती रहेगी।


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