चंपावत: पहाड़ी बोली में गूंज रहा सनातन का संदेश, आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री की कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़।

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रामायण-महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से संस्कार, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का दे रहे संदेश।

लोहाघाट, 12जून। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित धार्मिक कथा इन दिनों आस्था और संस्कृति का केंद्र बनी हुई है। युवा कथावाचक आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री ठेठ पहाड़ी बोली में रामायण और महाभारत के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को सनातन धर्म, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश दे रहे हैं। उनकी सहज शैली और ओजस्वी वाणी से प्रभावित होकर नगर सहित दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि रामायण और महाभारत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाले महान ग्रंथ हैं। इनमें परिवार, समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने वाले अनेक जीवन मूल्यों का समावेश है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र और समाज की दिशा तय करते हैं।
उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। जिस परिवार में माता-पिता प्रसन्न रहते हैं, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने परिवारों में बढ़ती दूरियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वार्थ और भौतिकवाद के कारण रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, जबकि भारतीय संस्कृति प्रेम, त्याग और भाईचारे का संदेश देती है।
आचार्य ने बेटियों को परिवार का सौभाग्य बताते हुए कहा कि जिस घर में बेटी जन्म लेती है, वहां खुशहाली और समृद्धि का आगमन होता है। उन्होंने लोगों से सकारात्मक सोच अपनाने और अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में कथा वाचन के दौरान लोगों को अपनी मातृभाषा से गहरा लगाव देखकर उन्होंने पहाड़ी भाषा में कथा कहना शुरू किया। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी लोकभाषा, संस्कृति और सनातन परंपरा से जोड़ना है। उनकी इस पहल को श्रद्धालुओं का भरपूर स्नेह और समर्थन मिल रहा है।
रामलीला मैदान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

फोटो_रामलीला मैदान में ठेठ पहाड़ी भाषा में कथा वाचन करते आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री।


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