चंपावत: बारिश में भी नहीं थमा सियासी बवाल, हल्द्वानी मुद्दे पर भाजपा का वार!

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धरने में खाली कुर्सियां बनीं चर्चा का विषय।

चंपावत। आसमान से बारिश की धार बरसती रही और चंपावत में सियासत का पारा चढ़ता रहा। हल्द्वानी में आठ अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ विवाद करीब एक माह बाद भी भाजपा-कांग्रेस के बीच टकराव का मुद्दा बना हुआ है। सोमवार को भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने मोटर स्टेशन बाजार में सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना देकर कांग्रेस पर हमला बोला।

धरने में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर हल्द्वानी की घटना को राजनीतिक रंग देने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने को संबोधित करते हुए भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दर्पण कुमार ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम के बाद रामलीला मैदान में फैली गंदगी को स्थानीय युवाओं ने स्वेच्छा से साफ किया था। उन्होंने दावा किया कि सफाई अभियान में मुस्लिम समाज के युवा भी शामिल थे और अभियान से जुड़े युवाओं का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं था।

दर्पण कुमार ने आरोप लगाया कि सफाई अभियान के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने बाद में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर विवाद को फिर हवा दे दी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को भाजपा से जोड़ने का प्रयास किया गया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति पर काम करती है।

भाजपा ने जिस समय धरना दिया, उस समय चम्पावत में मूसलाधार बारिश हो रही थी। खराब मौसम का असर कार्यक्रम की भीड़ पर साफ दिखाई दिया। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली रहीं और अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ता नहीं जुट सके। आयोजकों ने कम भीड़ की वजह खराब मौसम को बताया, लेकिन खाली कुर्सियों का मंजर राजनीतिक चर्चा का विषय जरूर बन गया।
बारिश के बावजूद मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के चलते मोटर स्टेशन और मुख्य बाजार में कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।

हल्द्वानी का विवाद अब चंपावत तक पहुंच चुका है। भाजपा इसे सामाजिक सौहार्द से जोड़कर कांग्रेस को घेर रही है, जबकि कांग्रेस इस मामले को अलग राजनीतिक नजरिए से देख रही है। ऐसे में विवाद के बहाने दोनों दलों के बीच सियासी तलवारें खिंची हुई हैं।

भारी बारिश के बीच भाजपा का सड़क पर उतरना बताता है कि पार्टी इस मुद्दे को आसानी से ठंडा नहीं पड़ने देना चाहती। मगर धरने की खाली कुर्सियों ने भीड़ के सवाल को भी सामने खड़ा कर दिया। अब देखना यह है कि हल्द्वानी का यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी से आगे कितना असर छोड़ता है और आने वाले दिनों में चंपावत की सियासत में इसकी तपिश कितनी बढ़ती है।

फोटो_मंच पर मौजूद भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता।


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