डिमांड बढ़ने से सक्रिय हुआ नेटवर्क, गैंगस्टर एक्ट और आर्थिक जब्ती से होगी बड़ी कार्रवाई।
चंपावत। जिले में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाने के बावजूद पुलिस के सामने इसकी जड़ों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बना हुआ है। जांच में सामने आया है कि चंपावत में पकड़ी जा रही नशीले पदार्थों की खेप के तार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और बरेली तक जुड़े हुए हैं। ऐसे में पुलिस अब केवल पेडलरों तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम कर रही है।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि नशे के कारोबार को बढ़ावा देने में डिमांड और सप्लाई, दोनों की अहम भूमिका है। उनका कहना है कि गिरफ्तार होने वाला हर व्यक्ति मुख्य सरगना नहीं होता, बल्कि वह एक बड़े और संगठित नेटवर्क की छोटी कड़ी होता है। इसलिए प्रत्येक मामले में आरोपियों के बैकवर्ड लिंकेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि सप्लाई चेन की ऊपरी कड़ियों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस के अनुसार, बीते कुछ समय पहले एमडीएमए की एक खेप की जांच के दौरान एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ था। इस मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने के साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-एफ के तहत संपत्ति जब्त करने, हिस्ट्रीशीट खोलने और प्रिवेंटिव डिटेंशन जैसे कदम भी उठाए गए थे।
एसपी रेखा यादव का कहना है कि बदलती जीवनशैली, बेरोजगारी और युवाओं में बढ़ती निराशा भी नशे की समस्या को बढ़ा रही है। ऐसे में केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
पुलिस का मानना है कि नशे के कारोबार की कमर तोड़ने के लिए उसकी आर्थिक जड़ों पर प्रहार करना आवश्यक है। आने वाले दिनों में पुलिस की प्राथमिकता उन लोगों तक पहुंचने की होगी, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।
फ़ोटो_रेखा यादव (एसपी) चंपावत।
