खटीमा के तीन विशेषज्ञों के तबादले रद्द, लेकिन चंपावत-लोहाघाट और टनकपुर के डॉक्टरों के आदेश बरकरार; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल।
चंपावत। मुख्यमंत्री के मॉडल जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादलों को लेकर जन असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। राजकीय चिकित्सालय खटीमा से स्थानांतरित हड्डी रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और एमडी फिजिशियन के तबादले मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद रद्द किए जाने के बावजूद चंपावत जिले से स्थानांतरित किए गए अधिकांश विशेषज्ञ चिकित्सकों के आदेश अब तक बरकरार हैं। ऐसे में जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी और असमंजस दोनों बढ़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं से जिला अस्पताल चंपावत और उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल रहा था और रेफरल की स्थिति में काफी कमी आई, ऐसे डॉक्टरों का तबादला आखिर क्यों किया जा रहा है? लोगों का सवाल है कि जब पहाड़ों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय तक प्रयास करने पड़ते हैं, तो पहाड़ में रहकर सेवा देने के इच्छुक चिकित्सकों को हटाने का औचित्य क्या है?
लोहाघाट में चेस्ट फिजिशियन डॉ. रविंद्र बोरा, उनकी विशेषज्ञ चिकित्सक पत्नी डॉ. चित्रलेखा और नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. ज्ञान प्रकाश को स्थानीय लोग क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानते हैं। इन चिकित्सकों ने मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ में रहकर सेवा देने का निर्णय लिया, जिसका सीधा लाभ स्थानीय मरीजों को मिला।
वहीं महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका गिरी की सेवाओं को लेकर भी क्षेत्र में खासा भरोसा बना है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कम समय में करीब 150 जटिल ऑपरेशन कर महिलाओं को उपचार के लिए हल्द्वानी रेफर होने से बचाया। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञान प्रकाश द्वारा बच्चों के जटिल उपचार किए जाने से भी लोगों को बड़ी राहत मिली। चिकित्सकों की बेहतर सेवाओं का असर अस्पताल में बढ़ती मरीजों की संख्या के रूप में भी देखने को मिला है।
बताया जा रहा है कि डॉ. मोनिका गिरी अपनी बीमार मां के साथ रहती हैं और उनका कहना है कि वह नौकरी छोड़ सकती हैं, लेकिन मां को इस हालत में छोड़कर नहीं जा सकतीं। ऐसे में यदि दोनों प्रमुख अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञों की कमी होती है तो मरीजों को एक बार फिर बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करने की नौबत आ सकती है। यही आशंका लोगों की चिंता और आक्रोश को और बढ़ा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और चंपावत को मॉडल जिला बनाने की बात कर रही है, लेकिन दूसरी ओर विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले किए जा रहे हैं। लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जनहित और मरीजों की सुविधा को देखते हुए चंपावत जिले से स्थानांतरित किए गए विशेषज्ञ चिकित्सकों के आदेशों पर भी पुनर्विचार कर उन्हें यथावत रखा जाए।
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डॉक्टरों के तबादलों पर खामोश क्यों हैं दर्जा राज्य मंत्री और भाजपा नेता?
चंपावत। विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादलों को लेकर जनता अपने स्तर पर आवाज उठा रही है, लेकिन जनसमस्याओं को शासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले दर्जा राज्य मंत्रियों और भाजपा नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं। यूकेडी युवा नेता रमेश बिष्ट समेत अन्य लोगों का कहना है कि यदि जनहित से जुड़े ऐसे गंभीर मुद्दों को मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखा जा सकता तो फिर इन पदों की उपयोगिता क्या है?
लोगों का आरोप है कि सरकार के नुमाइंदे और भाजपा पदाधिकारी जनता की समस्याओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी। लोगों ने मांग की है कि राजनीतिक प्रतिनिधि फोटो और कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यमंत्री के समक्ष ठोस पैरवी करें।
फोटो_उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका गिरी के कक्ष के बाहर उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार करती महिलाओं की भीड़।
चंपावत: मॉडल जिले में डॉक्टरों के तबादलों से भड़का जनाक्रोश, विशेषज्ञ चिकित्सकों को रोकने की जोरदार मांग।
