

सीमांत गांवों में मौन पालन से रोजगार की नई राह, एसएसबी कमांडेंट और डीएम ने बनाई योजना।
चंपावत। पहाड़ की प्राकृतिक संपदा को रोजगार में बदलकर पलायन पर लगाम लगाने की पहल तेज हो गई है। सीमांत गांवों में मौन पालन को बढ़ावा देकर चंपावत के जैविक शहद को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी है। एसएसबी की पांचवीं वाहिनी के कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम और जिलाधिकारी मनीष कुमार ने इस दिशा में संयुक्त प्रयास करने पर जोर दिया है। योजना धरातल पर उतरी तो मौन पालन ग्रामीणों की आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है।
एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम ने कहा कि चंपावत की स्वच्छ आबोहवा, प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता रोजगार की अपार संभावनाएं समेटे हुए हैं। इसके बावजूद लोगों का रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों की ओर पलायन करना चिंता का विषय है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौन पालन को बढ़ावा देना भी इसी पहल का हिस्सा है। जिले में पहाड़ से लेकर मैदान तक विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां, फल और फूल उपलब्ध हैं, जो शहद उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं।
कमांडेंट के अनुसार, स्थानीय मौन पालकों ने अभी तक माइग्रेशन सिस्टम नहीं अपनाया है। इस व्यवस्था के तहत मधुमक्खियों के बक्सों को फूलों की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में ले जाया जाता है। इससे शहद उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जैविक शहद की मार्केटिंग में भी अधिक परेशानी नहीं होगी। एसएसबी की विभिन्न बटालियनों में ही इसकी खपत की संभावनाएं मौजूद हैं।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जिले में मौन पालन विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए पहल की गई है। सफलता मिलने पर कार्यक्रम को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। नेपाल सीमा से लगे गांवों में मौन पालन की विशेष संभावनाएं हैं। शीतकाल में महाकाली नदी घाटी में च्यूरा और सरसों में फूल आने से मधुमक्खियों को पर्याप्त आहार मिल सकता है।
डीएम ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के दौरे के दौरान स्थानीय उत्पादों के जरिए रोजगार बढ़ाने की संभावनाएं सामने आई हैं। मौन पालन को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का एसएसबी का प्रयास सीमांत गांवों में स्वरोजगार और आर्थिक समृद्धि का रास्ता खोल सकता है।
फोटो_सीमांत गांवों में मौन पालन को बढ़ावा देने की पहल कर रहे जिलाधिकारी मनीष कुमार और एसएसबी कमांडेंट सुरेंद्र विक्रम।




